महिलाओं को अनचाहे गर्भ से मुक्ति देने के लिए कॉपर-टी का इस्तेमाल किया जाता है। गर्भनिरोधक के इस विकल्प को मुख्यत: पहले मां बन चुकी महिलाओं के लिए उपयोगी बताया जाता है। इस उपकरण को महिलाओं के गर्भाशय में लगाया जाता है, जिसकी मदद से महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

क्या कॉपर-टी को लगाना सुरक्षित है?

कॉपर-टी को इस्तेमाल करते समय महिलाओं के मन में आने वाले इस सवाल के जवाब में विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्भ को टालने की यह तकनीक काफी प्रभावशाली है। इसका टी आकार गर्भाशय में आसानी से स्थित हो जाता है। इसके अलावा कॉपर टी आसानी से महिलाओं के गर्भाशय में बनने वाले अंडे को शुक्राणु से निषेचित नहीं करने देती है। जिस तरह से लगाने के बाद यह गर्भनिरोधक के रूप में काम करना शुरू कर देती हैं, ठीक उसी तरह इसको हटाने के बाद आप गर्भधारण करने में आसानी से सक्षम हो पाती हैं। कॉपर-टी को 10 सालों तक गर्भ रोकने के लिए बनाया जाता है, लेकिन कई कॉपर-टी 5 सालों तक ही कार्य कर पाती हैं। गर्भ को रोकने के कार्य की क्षमता कॉपर-टी की गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है। इसके अलावा यदि आप जल्द गर्भवती होना चाहती हैं, तो किसी भी समय इसको निकालकर गर्भधारण कर सकती हैं।

कॉपर-टी निकालने का तरीका

कॉपर-टी को निकालने का एक साधारण तरीका होता है। इसको आप अपने डॉक्टर की मदद से निकाल सकती हैं। कॉपर-टी को निकालने के एक माह के अंदर ही आपका शरीर 30 प्रतिशत गर्भाधारण करने लायक हो जाता है। कॉपर-टी के निचले छोर पर एक धागा होता है, जिसको बाहर की ओर खिंचने से यह आसानी से बाहर निकल आता है। लेकिन यह रक्त स्राव मासिक धर्म की तरह नहीं होता है। कॉपर-टी को निकालने के तुरंत बाद इस तरह का रक्त स्राव होना आम बात है। कई मामलों में यह रक्त स्राव अपने आप ठीक हो जाता है। यदि कॉपर-टी को लगाने की अधिकतम अवधि पूरी हो चुकी है, तो आप इसको निकाल कर उसी समय दूसरी कॉपर-टी भी लगवा सकती हैं।

कॉपर-टी लगाने के फायदे

  • इसके इस्तेमाल के बाद अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए महिलाओं को अनावश्यक तनाव नहीं लेना पड़ता है।
  • यदि कोई महिला गर्भवती होना चाहती हैं तो वह कॉपर-टी को आसानी से हटा सकती है।
  • कॉपर-टी को 10 सालों तक इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है।
  • लंबे समय तक प्रयोग में लाए जाने के कारण कॉपर-टी गर्भनिरोधक के अन्य विकल्पों की अपेक्षा सस्ता विकल्प माना जाता है।

कॉपर-टी के नुकसान

1. बार-बार खून आना : कई महिलाओं को कॉपर-टी लगाने के बाद बार-बार रक्त स्राव होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह समस्या महिलाओं में कॉपर-टी लगाने के शुरुआती दौर में सामने आती है। इसके अलावा कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में ऐंठन होने की समस्या होती है। मासिक धर्म में होने वाली सामान्य ऐंठन से यह परेशानी अलग होती है। इस दर्द में आप दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर सकती हैं।

2. संक्रमण होना : जिन महिलाओं को तांबे से एलर्जी होती है, उनको कॉपर-टी लगाने से रैशेज व योनि में खुजली की समस्या हो सकती है। लेकिन, ऐसा बेहद कम महिलाओं को होता है। इस तरह के संक्रमण को दूर करने के लिए आपके पास कॉपर-टी निकालने का ही विकल्प बचता है। कॉपर-टी से संक्रमण होने पर आप गर्भनिरोधक के किसी अन्य विकल्प को चुन सकती हैं।

3. गर्भाशय में समस्या होना : कई महिलाओं में कॉपर-टी खुद-ब-खुद बाहर आ जाती है। कॉपर-टी लगाने के शुरुआती दौर में ही ऐसी समस्या सामने आती है। बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद या पहले कभी प्रेग्नेंट न होने वाली महिलाओं में इस तरह की परेशानी देखने को मिलती है।

4. गर्भाशय में गंभीर चोट : कई बार कॉपर-टी को लगाने के दौरान महिलाओं के गर्भाशय में खरोंच लग जाती है। इसके अलावा कुछ मामलों में महिलाओं के गर्भाशय में गंभीर चोट भी आ जाती है, जिसके कारण गर्भाशय की परत क्षतिग्रस्त हो जाती है या उसमें से खून आने लगता है। इस स्थिति में यदि कॉपर-टी को तुरंत नहीं निकाला जाए तो यह गर्भाशय में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है।

5. यौन संक्रमण से बचाव नहीं होता : कॉपर-टी को लगाने के बाद भी महिलाएं यौन संक्रमण का शिकार हो सकती हैं। इसलिए कॉपर-टी लगाने के बाद भी यौन संक्रमणों से बचाव करना बेहद जरूरी होता है। ठ्ठ

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