लौंग का प्रयोग अधिकतर मसाले के रूप में होता है। आयुर्वेद में लौंग को महान गुणकारी कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार लौंग, तीक्ष्ण, त्रिदोषनाशक, क्षय रोग एवं खांसी को नष्ट करने वाला, हिचकी, पेट दर्द तथा कफ-पित्त का नाश करने वाला होता है। नेत्र के लिए इसे अत्यन्त उपयोगी माना गया है। लौंग का प्रयोग करके मुंह की दुर्गंध को भी दूर किया जा सकता है। इसके और भी कई लाभ हैं-
गले में खराश हो तो लौंग भूनकर, पीसकर चाटें। इससे गले की खराश में आराम मिलेगा।
- खांसी के लिए लौंग से उत्तम कुछ भी नहीं। सूखी या कफ वाली खांसी हो तो लौंग को गर्म करके मुंह में रखकर चूसते रहें। इससे खांसी ठीक हो जाती है।
- कोई विषैला कीड़ा काट ले तो लौंग को पानी में घिसकर लगाने से, राहत मिलती है।
- आपको बार-बार हिचकी आ रही है तो दो लौंग पानी के साथ ले लें। हिचकी तुरन्त रुक जाएगी।
- लौंग का प्रतिदिन प्रयोग करने से मूत्र सम्बन्धी विकार दूर होते हैं।
- हृदय में जलन हो रही हो तो लौंग को ठंडे पानी में पीसकर मिश्री मिलाकर पी लें। ऐसा करने से तुरन्त आराम मिलेगा।
- लौंग एवं हरड़ का काढ़ा बनाकर उसमें सेंधा नमक डालकर लें। इस काढ़े को तीन दिन तक रात्रि को सोने से पहले पीने से अजीर्ण नष्ट होता है तथा कब्ज में भी ऐसा करने से लाभ होता है।
- सिर में तेज दर्द हो रहा हो तो लौंग का तेल सिर पर मलें। ऐसा करने से सिरदर्द बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
- दांत में दर्द हो तो दर्द के स्थान पर सींक या सलाई से लौंग का तेल लगाएं। इससे दर्द ठीक हो जाएगा ।
- आपको पायरिया की शिकायत है तो दांतों पर लौंग के तेल की मालिश करें तथा हमेशा एक लौंग मुंह में रखें और उसे चूसते रहें। ऐसा करने से दांत के कीड़े भी नष्ट हो जाते हैं और मुंह से बदबू आनी भी बन्द हो जाती है ।
- लौंग तथा हल्दी को पीसकर फोड़े पर लगाने से घाव जल्दी ही भरने लगता है।
