6 महीने के बाद बच्चों को पोषण के लिए इन 4 फूड्स का करवाएं सेवन: Healthy Food Options for Babies
6 महीने के बच्चों के शरीर का सम्पूर्ण विकास हो सके। इसके लिए मां के दूध के अलावा इन फूड्स का भी सेवन करना बेहद जरूरी होता है।
Healthy Food Options for Babies: नवजात शिशु को 6 महीने तक बस मां का दूध पिलाया जाता है, जिससे की शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास अच्छे से होता है। लेकिन डॉक्टर 6 महीने के बाद शिशु को मां के दूध के अलावा ऊपर का सामान खाने की भी सलाह देते है, जैसे की सब्जियां, फल और अनाज की प्यूरी। इन सभी चीजों का सेवन शिशु के लिए अच्छा माना जाता है। अधिकतर लोग 6 महीने के बाद शिशु को सिर्फ दाल और चावल के पानी का सेवन करवाते है। लेकिन इससे शिशु को ज्यादा फायदा नही होता है। ऐसे में बच्चे को उन चीजों का सेवन करवाए, जिसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है जो बच्चे के शारीरिक और मानिसक विकास में काफी हद तक मदद करते है। अब कई बार नई मां को पता भी नही होता है की 6 महीने के बाद शिशु को किन इन चीजों का सेवन करवाना चाहिए। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने वाले है, जो आप अपने बच्चे को 6 महीने के बाद खिला सकते है, तो चलिए जानते है।
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मैश पपीता

मैश पपीता शिशु के लिए काफी अच्छा होता है। ये पोष्टकि होने के साथ- साथ स्वादिष्ट और पचाने में भी आसानी है। पपीता को मैश करने से शिशु इसे आसानी से खा लेते है, जो उनके शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। पपीता में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्यूनिटी सिस्टम को बेहतर बनाता है। पपीते में मौजूद एंजाइम पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, जो कब्ज जैसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। पपीते का सेवन करने शिशु का शरीर हाइड्रेटेड रहता है। इसके लिए सबसे पहले पपीते को धोकर छिल लें और इसमें से सारे बीज निकाल लें। अब पपीते को छोटे- छोटे टुकड़ों में काटकर फोर्क या हैंड ब्लेंडर की मदद से मैश कर लें। फिर इसे शिशु को खिलाए।
गाजर- चुकंदर मैश

आप बच्चे को 6 महीने के बाद गाजर- चुकंदर को मैश करके इसका सेवन करवा सकते है। इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होता है। यह शिशु के स्वास्थ्य और विकास में काफी मदद करता है। गाजर में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है, जो शिशु के इम्यूनिटी सिस्टम को बेहतर बनाता है। वहीं चुंकदर में आयरन, विटामिन सी और फोलेट पाया जाता है, जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाता है। इसके अलावा गाजर और चुकंदर में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शिशु को कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
सॉफ्ट इडली

6 महीने के बाद आप बच्चे को घर पर बनाकर सॉफ्ट इडली खिला सकते है। इडली शिशुओं के लिए हल्का और हेल्दी आहार होता है। ये पचाने में आसान रहता है। इडली को दाल और चावल के मिश्रण से बनाया जाता है, जो प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्त्रोत होता है। ये शिशु के विकास में काफी मदद करते है। इडली में मौजूद प्रोबायोटिक्स शिशु के पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है।
मैश खिचड़ी

8 से 9 महीने के बाद आप शिशु को मूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी देना लाभदायक माना जाता है। मैश खिचड़ी शिशु के पेट के लिए भी अच्छा होता है। खिचड़ी में मौजूद दाल और चावल प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा सोर्स है। खिचड़ी में मौजूद प्रोटीन शिशुओं के विकास और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। लेकिन भोजन देते समय इस बात का खास ख्याल रखें की बच्चे को कम मात्रा में ही भोजन दें, जिससे की वो आसानी से पाचा सके।
