इस भागदौड़ भरी जिंदगी में थकना मना है खासकर महिलाओं के लिये, क्योंकि घर-परिवार और ऑफिस में तालमेल बिठाने के लिए हर महिला का मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रहना बहुत जरूरी है। पर अक्सर देखने को यह मिलता है कि महिलाएं परिवार का तो पूरा $ख्याल तो रखती हैं, पर अपनी सेहत को अनदेखा कर देती हैं, जिसके चलते उनका इम्यूनिटी सिस्टम बिगड़ जाता है और वह कई बिमारियों से ग्रस्त हो जाती है। ऐसा ना हो इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसे योगासन को स्थान दें, जो उनकी स्टेमिना को बढ़ाए और उन्हें उर्जा से भरपूर रखे। क्या है वो योगासन आइए जानें-

नौकासन 

जैसा कि नाम से पता चल रहा है नौकासन मतलब नाव जैसा आसन। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप दंडासन में बैठ जाओ। इसके बाद हल्के हाथ से जमीन को दबाते हुए सांस अंदर की तरफ लें, अब अपनी रीढ़ की हड्डी को लंबा करने का प्रयास करें। सांस बाहर छोड़ते हुए अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की ओर उठाएं। अपने दोनों को साठ डिग्री तक लाएं इस दौरान अपने दोनों हाथ नीचे ही लगाकर रखें। अब आप सांस को अंदर की ओर लेते हुए पीछे की ओर झुकें। याद रखें कमर के जोड़ों से नहीं झुकना केवल कूल्हों के जोड़ों से झुकना है। अपने दोनों हाथ उठाकर घुटनों के पास ले आएं। तकरीबन पांच.छ: बार सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। अब आसन से बाहर निकलने के लिए हाथ को नीचे टिकाएं और सांस छोड़ते हुए अपने धड़ को सीधा करें। इस दौरान पीठ को सीधा रखें और वापस ऊपर आएं। अब दोनों पैरों को नीचे कर लें।

उर्ध्व धनुरासन 

इसे चक्रासन भी कहते हैं। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। अपने दोनों घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद दोनों तलवों को जमीन पर मजबूती से टिका लें। इसके बाद अपने दोनों हाथ सिर की तरफ उठाकर हथेलियों को जमीन पर लगाएं। अपने दोनों पैरों और हथेलियों के बीच लगभग डेढ़ फिट का गैप रखें। अपने हाथों और पैरों के सहारे बाकी शरीर ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान सांस रोक कर रखे। पंद्रह सेकेंड तक रुकें, वापस अपनी मुद्रा में आएं और पीठ के बल लेट जाएं। इस आसन को चार से पांच बार करें।

उर्ध्व मुख श्वासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाएं। पैरों के तलवे ऊपर की तरफ रखें। अपने हाथ शरीर से चिपकाकर नीचे की ओर रखें। अब अपने दोनों हाथ उठाकर बगल के पास रखें। हाथों पर वजन डालते हुए कंधों को ऊपर उठाएं और अपने बांहों को सीधा करें। आप तब तक ऊपर आएं अब तक कि दोनों हाथ सीधे न हो जाएं। पैर पंजों के बल ही टिका कर रखे। पीठ जितनी मोड़ी जाये उतनी ही मोड़ें। अब सिर को ऊपर उठाते हुए आसमान की तरफ देखें। अब पांच से छ: बार सांस लें और पुन: पहले की अवस्था में आएं।

उष्ट्रासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठें। दोनों हाथों को अपने शरीर के साथ रखते हुए घुटनों के बल खड़े हों जाएं। पीछे झुकते हुए दाएं हाथ से दाएं पैर की एड़ी को पकड़ें और बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी को पकड़ें। अब अपने सिर को पीछे झुकाएं और पेट आगे की तरफ कमर और सिर को पीछे की ओर रखें। इसी अवस्था में पंद्रह सेकेंड तक रहें और सांस लेते और छोड़ते रहें। सांस छोड़ते हुए पहले की स्थिति में आ जाएं।

मत्स्यासन 

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप कमर के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर से चिपकाकर रखें। पैरों को आपस में चिपका लें। अब अपने दोनों हाथों को कूल्हों के नीचे ले जाएं और दोनों हथेलियां जमीन पर टिका दें। अब सांस को अंदर लें और सिर व छाती को ऊपर की तरफ उठाएं। इसके बाद छाती को ऊपर ही रहने दें व सिर को जमीन पर टिकाने का प्रयत्न करें। अब अपनी कोहनियों को जमीन पर दबाएं और सारा भार कोहनियों पर डालें न कि सिर पर। छाती को ऊपर उठाएं और पैरों और जांघों को जमीन पर टिका कर रखें। अब गहरी सांस लें और इसी अवस्था में रहें। अब सिर को ऊपर उठाएं और छाती को नीचे करते हुए पहले की अवस्था में आएं।

धनुरासन

इस आसन में शरीर धनुष की तरह हो जाता है इसलिए इसे धनुरासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों घुटनों को मोड़ कर पैरों को ऊपर की ओर उठाएं। अब अपने दोनों हाथों से पैरों के टखनों को पकड़ लें, इस दौरान हाथ व कोहनी सीधी रहनी चाहिए। अब पैरों को बाहर की ओर खोलते हुए अपने घुटनों को ऊपर की ओर उठाइये। सांस अंदर लेते हुए अपनी छाती भी उठाएं। गर्दन उठाकर ऊपर की ओर देखें। आप पूरी तरह धनुष की तरह बन जाएं। पूरी ताकत के साथ आगे और पीछे का भाग उठाएं। दस-बीस सेकेंड इसी स्थिति में रहें। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पहले की स्थिति में आ जाएं। इसे केवल दो से तीन बार ही करें।

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