उचित निदान और विश्लेषण पद्धतियों की उपलब्धता के अभाव में इनफर्टिलिटी का वास्तविक कारण ज्ञात नहीं हो पाता है, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान की तरक्की ने इनफर्टिलिटी के असल कारण जानने और इलाज को संभव बना दिया है। देखा गया है कि पुरुष नपुंसकता दंपती के निःसंतान रहने का बड़ा कारण है और प्रत्येक तीन में से एक व्यक्ति कमोबेश इनफर्टिलिटी की समस्या से पीड़ित रहता है। निःसंतान दंपतियों की संख्या में तेज वृद्धि हो रही है, क्योंकि इनफर्टिलिटी के कारण पुरुष अपनी पत्नी को गर्भवती बनाने में असमर्थ होते हैं। गर्भनिरोधक उपाय आजमाए बगैर एक साल तक यौन संबंध बनाने पर भी जब गर्भ नहीं ठहरता है तो इसे इनफर्टिलिटी की स्थिति मान लिया जाता है।

आम तौर पर इस तरह की समस्या कम संख्या में और कमजोर स्पर्म (शुक्राणु) के कारण होती है जबकि गर्भधारण के लिए ताकतवर स्पर्म की ही जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में गर्भाशय (फेलोपियन ट्यूब) तक स्पर्म पहुंच ही नहीं पाता है और अनेक प्रयासों के बावजूद महिला पार्टनर गर्भधारण करने में असमर्थ होती है। 

कारक

पुरुष इनफर्टिलिटी के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं, जिनमें से मुख्य कारण धूम्रपान और अधिक मात्रा में मदिरापान करना है। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि अपनी सुदृढ़ शारीरिक संरचना के लिए लड़के कम उम्र से ही स्टेरॉयड और दवाइयों का सेवन करने लगते हैं जिस कारण बाद में उन्हें इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ जाता है। बहुत ज्यादा एक्सरसाइज और डायटिंग के लिए भूखे रहने जैसी आदतें भी पुरुष फर्टिलिटी को प्रभावित करने का प्रमुख कारण है। युवाओं में बढ़ते तनाव और अवसाद के साथ-साथ प्रदूषण और निष्क्रिय लाइफस्टाइल के कारण एनीमिया की समस्या भी पुरुष इनफर्टिलिटी का कारण बनती है। इनफर्टिलिटी से जुड़ी सबसे जटिल स्थिति तब पैदा होती है जब पुरुष के वीर्य में स्पर्म ही नहीं बन पाते हैं। इस स्थिति को एजूस्पर्मिया कहा जाता है। भारत में करीबन एक प्रतिशत पुरुष आबादी इसी समस्या से ग्रस्त है।

मानसिक तनाव

इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे दंपती शारीरिक और मानसिक तनाव की स्थिति में पहुंच जाता है। अक्सर देखा गया है कि ऐसे मामलों में या तो स्पर्म की मात्रा या स्पर्म की सक्रियता बहुत कम रहती है। लिहाजा ऐसे स्पर्म महिला पार्टनर के अंडाणु को गर्भाधान के लिए सक्षम बनाने में विफल रहते हैं। लेकिन अब विज्ञान और टेक्नोलॉजी की तरक्की ने असंभव को भी संभव बना दिया है। ऐसी चिकित्सा समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए अब कारगर समाधान उपलब्ध हो गए हैं।

जांच

अब इनफर्टिलिटी से निजात पाने के लिए कई उपयोगी उपचार उपलब्ध हैं। ओलिगोस्पर्मिया ऐसी ही एक स्थिति है जिसमें स्पर्म की संख्या बहुत कम पाई जाती है और एजूस्पर्मिया की स्थिति में तो वीर्य के नमूने में स्पर्म होता ही नहीं है। एजूस्पर्मिया की स्थिति में पुरुष के वीर्य से स्पर्म नहीं निकलता है जिसे जीरो स्पर्म काउंट कहा जाता है। एजूस्पर्मिया स्पर्म उत्पादन या स्पर्म डिलेवरी से जुड़ी समस्या का परिणाम हो सकता है। इसका पता वीर्य की जांच के बाद ही लग पाता है। इसकी जांच के लिए वीर्य का नमूना इकट्ठा किया जाता है जिसके तहत स्पर्म की संख्या, आकार और सक्रियता की जांच की जाती है।

कारण – निवारण

  • बहुत सारे लोगों का स्पर्म काउंट जीरो होता है। एजूस्पर्मिया का कारण बनने वाली इस आम स्थिति के लिए हार्मोनल असंतुलन, चोट, टेस्टिकुलर विफलता या संक्रमण को जिम्मेदार माना जाता है। कुछ मामलों में जांच के दौरान तो स्पर्म नजर आता है लेकिन किसी व्यवधान के कारण यह स्खलित नहीं हो पाता है।
  • स्पर्म विकसित नहीं होने का एक और कारण है वैरिकोसिल, जिसका इलाज सर्जरी से ही संभव होता है। कुछ साल पहले तक स्पर्म विहीन या कम स्पर्म वाले व्यक्तियों के पास कोई विकल्प नहीं था। वे स्वाभाविक रूप से बच्चे का जैविक पिता नहीं बन सकते थे।
  • पिता बनने के लिए उन्हें या तो दाता के स्पर्म का इस्तेमाल करना पड़ता था या किसी बच्चे को गोद लेना पड़ता था। अब चिकित्सा विज्ञान में स्टेम सेल टेक्नोलॉजी की अद्भुत तरक्की ने लेबोरेटरी में स्पर्म बनाना संभव कर दिया है। लेबोरेटरी में स्पर्म का निर्माण मरीज के स्टेम सेल्स का इस्तेमाल करते हुए किया जाता है, फिर इसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया के जरिये महिला पार्टनर के अंडाशय में प्रत्यारोपित करते हुए अंडाणु में फर्टिलाइज किया जाता है। इस तरीके से मरीज की महिला पार्टनर गर्भधारण कर सकती है।
  • एजूस्पर्मिया से पीड़ित पुरुषों के पास अब कई सारे विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। दरअसल, व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है कि उसके लिए किस प्रकार का इलाज उपयुक्त होगा। स्टेम सेल थेरापी के जरिये उपचार भविष्य की उम्मीद बढ़ाने का वादा करता है।

(डॉ क्षितिज मुर्डिया, फर्टिलिटी एक्सपर्ट, इंदिरा इंफर्टिलिटी क्लिनिक एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, नई दिल्ली से बातचीत के आधार पर)