हाईपरटेंशन यानि उच्च रक्तचाप की बीमारी। मेडिकल टर्म के अनुसार हाईपरटेंश्न वह स्थिति होती है जब एक व्यक्ति का रक्तचाप सामान्य 120@80mm Hg से अधिक हो जाता है। क्योंकि एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति का उच्चतम रक्तचाप 120 तथा न्यूनतम 80 होता है। हाईब्लड प्रेशर के चलते धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है और दबाव की इस वृद्धि के चलते धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक ढंग से करने के लिए दिल को अधिक काम करने की जरूरत पड़ती है। जब यह समस्या गंभीर हो जाती है तो व्यक्ति को हार्टअटैक व हार्टस्ट्रोक तक आ जाता है साथ ही किडनी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। 
 
कारण
 
डाक्टर रवि गौड के अनुसार पिछले कुछ वर्षो में हमारे लाइफस्टाइल में आए बदलावों की वजह से यह बीमारी बड़ी तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही हैं। जैसे लोग शरीरिक रूप से एक्टिव नहीं रहते हैं, एक्सरसाइज नहीं करते हैं, अधिक नमक और फैट व जंक फूड खाते हैं। शराब, सिगरेट व तंबाकू को सेवन करते हैं। काम के चक्कर में तनाव में रहते हैं। इन सभी आदतों के चलते व्यक्ति उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित हो रहा है।  
 
सामान्य लक्षण
  • उच्च रक्तचाप होने पर व्यक्ति के सिर के पीछे और गर्दन में दर्द रहने लगता है। 
  • व्यक्ति को तेज चलने पर थकान महसूस होती है साथ ही तेज चलने व सीढ़िया चढ़ने पर उसकी सांस भी फूलने लगती है। 
  • सांस लेने में परेशानी होना, लंबी-लंबी सांस आना व  नाक से खून आना भी उच्च रक्तचाप की तरफ इशारा करते हैं। 
  • खुद को बहुत ज्यादा तनाव में महसूस करना व बात-बात पर गुस्सा होना। 
  • बहुत बार व्यक्ति को कमजोरी की वजह से भी चक्कर आते हैं लेकिन हाई बीपी होने पर व्यक्ति को चक्कर आते हैं । 
  • जिन्हें हाई बीपी की समस्या होती है उन्हें रात में ठीक से नींद नहीं आती है। 
  • यदि व्यक्ति की दिल की धड़कन पहले के मुकाबले तेज हो या दिल के आस-पास दर्द महसूस हो रहा है तो यह हाईपरटेंशन के लक्षण होते हैं। उपरोक्त सभी लक्षणों में से दो-तीन लक्षण भी दिखे तो व्यक्ति को तुरंत डाॅक्टर के पास जाना चाहिए, जिससे समय पर इलाज शुरू हो सके। 
बचाव व उपचार
 
डॅा रवि गौड़  के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप समस्या है तो समय पर अपनी दवाईया लेनी चाहिए और नियमित रूप से अपना बीपी चेक करवाते रहना चाहिए। 
  • खाने में नमक का प्रयोक कम से कम करना चाहिए क्योंकि सोडियम बीपी की समस्या को बढ़ा देता है। 
  • खाने में अधिक वसा वाले भोजन को त्याग देना चाहिए ।
  • प्रतिदिन 25 से 30 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। 
  • किसी तरह के मनासिक तनाव से खुद को दूर रखना चाहिए। 
  • धूम्रपान व शराब का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। 
  • हरी सब्जियों व फलों को अपनी डाइट में शामिल करे।