‘वर्ल्ड हाईपरटेंशन डे’ मनाने का मकसद विश्व भर के लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूक करना एवं लोगों को इस बीमारी से बचाव करने के उपायों को बताना है। डाॅक्टर्स हाईपरटेंशन को साइलेंट किलर कहते हैं क्योंकि इस बीमारी के अपने कोई खास लक्षण नहीं होते हैं। बहुत बार लोगों को सिर में दर्द या चक्कर आना व ठीक से नींद नहीं आने जैसी समस्याओं को लेकर डाॅक्टर के पास आते हैं तो जांच  से पता चलता है कि उनका ब्लड प्रेशर हाई है। यानी उन्हें उच्च रक्तचाप की बीमारी है और इस स्थिति में व्यक्ति का रक्तचाप सामान्य 120/80mmHg से अधिक हो जाता है। 
 
जाने क्या कहती हैं रिपोर्टस
 
पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर यदि नजर डाले तो मेट्रो सिटीज में हाईपरटेंशन के मरीजो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इंडस हेल्थ प्लस की रिर्पोट के मुताबिक दिल्ली की वर्किंग पाॅपुलेशन में से 40 फीसदी लोग हाईपरटेंशन की बीमारी से ग्रस्त हैं। एक आंकलन के अनुसार हर तीसरा भारतीय इस समस्या से ग्रस्त है। वहीं रिसर्च में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि दिल्ली में 25 से 35 वर्ष की आयु वर्ग वाली 22 फीसदी महिलाएं हाईपरटेंशन से पहले की स्थिति की शिकार हुई किंतु इलाज नहीं करवाने के चलते ये हाईपरटेंशन की बीमारी से ग्रस्त हो गयी। अब तो यह बीमारी शहरो से निकलकर गांवों तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2002 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी के चलते सबसे अधिक मृत्यु होने का जिम्मेदार बताया था। क्योंकि उच्च रक्चताप के मरीजों में स्ट्रोक का खतरा चार गुना अधिक होता है और हार्ट अटैक का खतरा दोगुना हो जाता है। 
 
जाने विश्व में हाईपरटेंशन का प्रभाव 
 
एक अनुमान के मुताबिक विश्वभर में 1.8 बिलियन लोग इससे पीड़ित हैं और दिन-ब-दिन बड़ी तेजी से यह बीमारी लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस बीमारी से ग्रसित 50 प्रतिशत से अधिक लोग अपनी इस बीमारी से पूर्णत अंजान रहते हैं। जिसके कारण वो कोई मेडिकल एक्शन नहीं लेते हैं और जब बीमारी कोई बड़ा रूप ले लेती है तब जाकर उन्हें अपनी इस बीमारी के बारे मे पता चलता है। इन्हीं सभी बातों को देखते हुए हाइपरटेंशन के बारे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से वर्ल्ड हाईपरटेंशन डे मनाया जाता है। हर साल इसकी थीम होती हैं। इस वर्ष की थीम है ‘know your number’। ऐसा नहीं है कि इस बीमारी से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है। सही खान-पान में सुधार, प्रतिदिन एक्सरसाइज और समय पर दवाईयों का सेवन करने व समय-समय पर बीपी की जांच करते रहने से हाईपरटेंशन पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। 
 
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