Anarkali Suit History
Anarkali Suit History

Overview: अनारकली की अमर गाथा

मुग़ल शासक नूर जहाँ के समय से शुरू हुआ अनारकली सूट का सफ़र सदियों पुराना है। फ्लोर-लेंथ (Floor-Length) घेरदार यह परिधान शुरू में शाही पहचान था। आज, यह क्लासी स्टाइल और ट्रेडिशनल ग्लैमर के मेल के साथ, मॉडर्न डिज़ाइन्स में ढलकर भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय फ़ैशन दोनों में अपनी शाही जगह बनाए हुए है।

Anarkali Suit History: अनारकली सूट भारतीय फैशन में सदियों से अपनी एक खास जगह बनाए हुए है। यह सिर्फ एक परिधान नहीं, बल्कि मुग़ल काल की भव्यता और इतिहास का प्रतीक है। हालांकि, यह आम धारणा है कि इसका नाम शहजादे सलीम (बाद में जहाँगीर) की प्रेमिका अनारकली के नाम पर पड़ा, लेकिन इसके पहनावे की शुरुआत और विकास एक लंबी कहानी है।

अनारकली नाम के पीछे का इतिहास

माना जाता है कि इस परिधान का नाम अनारकली (अनार की कली) के नाम पर पड़ा, जो मुग़ल बादशाह अकबर के दरबार की एक नर्तकी थीं। अनारकली के डांस मूव्स और उनकी सुंदरता को निखारने के लिए, इस फ्लेयर्ड और फिटिंग वाली पोशाक को डिज़ाइन किया गया था। यह उनकी चाल में एक शाही और नाटकीय अंदाज़ जोड़ता था।

मुग़ल काल में परिधान का विकास

अनारकली सूट की संरचना मुग़ल महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले ‘जामा’ और ‘अँग रखा’ से ली गई थी। यह पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला एक लंबा कोट जैसा परिधान था। यह शरीर को कसकर फिट होने वाला ऊपरी वस्त्र था। मुग़ल बेगमों ने इस पोशाक को और अधिक परिष्कृत (refined) किया। इसे एक लंबी फ्रॉक शैली दी गई, जो कमर से नीचे तक फुली हुई और घेरदार होती थी।

फैब्रिक

शुरुआती दौर में, मुग़ल बादशाहों और बेगमों के लिए यह ड्रेस मलमल, सिल्क, और वेलवेट जैसे कीमती कपड़ों से तैयार की जाती थी और इसमें ज़री, ज़रदोजी, और कीमती पत्थरों की कढ़ाई की जाती थी।

किस मुग़ल बादशाह की बेगम ने सबसे पहले पहना

इस बात का कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि किस विशिष्ट बादशाह की बेगम ने सबसे पहले अनारकली को पहना। लेकिन, इसका चरम विकास अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान हुआ यह पोशाक अकबर के समय से ही दरबार की नर्तकियों और बाद में जहाँगीर की बेगमों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई थी। नूर जहाँ जैसी फैशनपरस्त मुग़ल बेगमों ने इसे शाही दर्जा दिया। उन्होंने इसमें फ़ारसी डिज़ाइन और सुरुचिपूर्ण कढ़ाई को शामिल किया, जिससे यह परिधान शाही महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो गया।

ड्रेस को कैसे तैयार किया गया था

अनारकली सूट को शुरू में काफी जटिल तरीके से तैयार किया जाता था, इसमें एक लंबी कमीज़ होती थी जो घुटने से काफी नीचे तक जाती थी और इसमें सैंकड़ों प्लीट्स डालकर एक भव्य घेरा बनाया जाता था।

छाती और कमर के हिस्से को टाइट फिटिंग का रखा जाता था, ताकि शरीर का आकार सुंदर दिखे।इसे एक पारदर्शी या भारी कढ़ाई वाले दुपट्टे के साथ पहना जाता था, जिसे सिर या कंधे पर लिया जाता था।

पायजामा इसके नीचे एक चुड़ीदार पायजामा पहना जाता था, जो टाइट फिटिंग के कारण अनारकली के घेरे को और अधिक प्रभावी बनाता था। आधुनिक अनारकली सूट, हालांकि मुग़ल शैली से प्रेरित है, लेकिन अब इसे आसान कपड़े और डिज़ाइन के साथ रोज़मर्रा के फैशन का हिस्सा बना दिया गया है।

वस्त्रों में ‘पर्दा’ और ‘भव्यता’ का संतुलन

How The Anarkali Suit Became a Royal Icon
How The Anarkali Suit Became a Royal Icon

अनारकली सूट की लंबी और ढीली-ढाली (फ्लेयर्ड) संरचना मुग़ल काल की महिलाओं के लिए आवश्यक ‘पर्दा’ प्रथा को बनाए रखने में मदद करती थी। यह पोशाक सिर से लेकर पैर तक शरीर को ढँकती थी, लेकिन साथ ही कीमती वस्त्रों और कढ़ाई के कारण अपनी भव्यता भी बरकरार रखती थी।

नर्तकियों के लिए डिज़ाइन: नर्तकियों के लिए बनाया गया इसका संस्करण विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया था ताकि जब वे घूमती थीं, तो वस्त्र का घेरा खूबसूरती से फैलता था, जिससे उनकी चाल और प्रदर्शन में नाटकीय प्रभाव (Dramatic Effect) आता था।

अनारकली की ‘चुस्त चोली’ और ‘घेरदार फ्रॉक’ का मिश्रण

अनारकली सूट का ऊपरी हिस्सा (चोली/योग) मुग़ल साम्राज्य पर फारसी और तुर्की फैशन के प्रभाव को दर्शाता है। यहाँ कमर को पतला दिखाने के लिए चुस्त फिटिंग रखी जाती थी। घेरा बनाने के लिए कपड़े को सीधा नहीं काटा जाता था, बल्कि नीचे की ओर त्रिकोणीय आकार के कई कपड़े के टुकड़े (जिन्हें ‘कली’ कहा जाता है) जोड़े जाते थे। जितने अधिक ‘कली’ होती थीं, घेरा उतना ही बड़ा और भव्य बनता था। इससे पोशाक का नाम ‘अनारकली’ (अनार की कली) और भी सार्थक हो जाता है।

ब्रिटिश काल और फिर पुनर्जागरण

ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान, भारतीय फैशन में साड़ी और सलवार कमीज जैसे परिधान अधिक प्रमुख हो गए, और अनारकली सूट का उपयोग कुछ हद तक कम हो गया या यह केवल विशेष अवसरों तक सीमित हो गया। 1950 और 1960 के दशक में, बॉलीवुड फिल्मों, खासकर मुग़ल युग पर आधारित फिल्मों के कारण, अनारकली सूट ने फैशन में जोरदार वापसी की। मधुबाला ने जब फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ में अनारकली का किरदार निभाया, तो यह सूट एक बार फिर से आइकॉनिक और ट्रेडमार्क बन गया।

विभिन्न नामों से पहचान

इतिहास के विभिन्न चरणों में, अनारकली जैसी पोशाक को कई अन्य नामों से भी जाना जाता था, जैसे पेशवाज़, या केवल लम्बा अँग रखा। हालाँकि, ‘अनारकली’ नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध हुआ और आज भी चलन में है।

अनारकली क्यों बनी ‘अमर गाथा’

अनारकली सूट आज भी इसलिए इतना पॉपुलर है क्योंकि यह

हर बॉडी टाइप पर फिट: इसकी फ्लेयर्ड डिज़ाइन हर तरह की बॉडी पर सूट करती है।

ट्रेडिशन और मॉडर्निटी का मेल: यह अपने शाही टच को बरकरार रखते हुए मॉडर्न ट्रेंड्स (जैसे पॉकेट या बेल्ट) को अपनाता है।

वर्टाइल वियर: यह पार्टी, शादी, त्योहार और कैज़ुअल इवेंट्स—हर जगह पहना जा सकता है।

    इस तरह, अनारकली सूट ने सदियों का सफ़र तय किया है और आज भी भारतीय फ़ैशन में अपनी शाही जगह बनाए हुए है।

    मैं रिचा मिश्रा तिवारी पिछले 12 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विभिन्न न्यूज चैनल के साथ काम करने के अलावा मैंने पीआर और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट का काम भी किया है। इतने सालों में मैंने डायमंड पब्लिकेशंस/गृह लक्ष्मी, फर्स्ट...