कौन हैं उषा मेहता? ‘ऐ वतन मेरे वतन’ में जिनका रोल निभा रही हैं सारा अली खान: Know About Usha Mehta
Know About Usha Mehta

Know About Usha Mehta: अभिनेत्री सारा अली खान इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘ऐ वतन मेरे वतन’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में एक्ट्रेस का एक अलग ही अंदाज नजर आने वाला है। फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद से ही फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। फिल्म में सारा के अलावा इमरान हाश्मी, सचिन खेडेकर, अभय वर्मा और स्पर्श श्रीवास्तव जैसे कलाकार नजर आएंगे।

बात करें फिल्म में सारा अली खान के किरदार कि तो वो स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता की भूमिका निभाती नजर आएंगी। उनके काम को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। फिल्म में उस दौर के भारत को दिखाया जा रहा है जब देश पर पूरी तरह से अंग्रेज़ों का राज था। जब बोलने और सोचने की आज़ादी नहीं थी। फिल्म में उषा मेहता का किरदार निभा रहीं सारा रेडियो के जरिये बोलने की क्रांति लेकर आएंगी। आखिर उषा मेहता कौन थीं और क्या थीं आज़ादी के लड़ाई में उनकी भूमिका आइये जानते हैं-

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उषा मेहता, जिन्होंने रेडियो से लड़ी आजादी की लड़ाई

Know About Usha Mehta
Sara as Usha Mehta

उषा मेहता वो स्वतंत्र सेनानी हैं जिन्हें ‘कांग्रेस रेडियो’ की स्थापना करने वालों में से एक माना जाता है। 1942 में 14 अगस्त वो तारीख थी जब रेडियो के वेवलेंथ 42.34 मीटर पर लोगों ने पहली बार ‘कांग्रेस रेडियो’ सुना और इसपर सुनाई देने वाली आवाज 22 साल की उषा मेहता की थी। कहा जाता है कि उषा मेहता ने 8 साल की उम्र में किसी आंदोलन में ‘गो साइमन’ का नारा भी लगाया था।

गांधी जी का एक भाषण बना प्रेरणा

9 अगस्त, 1942 में गांधी जी ने मुंबई में जनता को ‘करो या मारो’ का ऐतिहासिक नारा दिया था। उनका यही भाषण उषा मेहता के लिए बड़ी प्रेरणा साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने दो साथी क्रांतिकारी चंद्रकांत बाबूभाई झावेरी और विट्ठलदास के झावेरी के साथ ‘सीक्रेट रेडियो’ शुरू किया। साथ ही उन्होंने नानका मोटवाने को भी साथ लिया। मोटवाने का परिवार उस समय एक टेलीफोन कंपनी ‘शिकागो रेडियो’ चलाता था। इस सबसे उन्हें काफी मदद मिली।

जब उषा का प्रयास सफल हुआ और अंग्रेजों के लिए परेशानी बना तो उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इस दौरान जब उन्हें कोर्ट में पेश किया तो उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। क्योंकि सुनवाई के दौरान जब उन्होंने जज से पूछा कि सभी सवालों के जवाब देना जरूरी है तो जज ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए उषा मेहता ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुप्पी साध ली।

जब देश आज़ाद हो गया तो उषा ने राजनीति से दूसरी बनाते हुए बीच में छूट गई पढ़ाई को पुनः शुरू कर यूनिवर्सिटी ऑफ बॉम्बे से गांधी दर्शन में पीएचडी की पढ़ाई की। स्वतंत्रता की लड़ाई में उषा मेहता एक ऐसा नाम है जिनका जिक्र बहुत ही काम जगह मिलता है। लेकिन सारा अलीख खान की फिल्म के बाद आज के लोग उनके बारे में अच्छी तरह जान पाएंगे। ये फिल्म 21 मार्च को रिलीज होने जा रही है।

वर्तमान में गृहलक्ष्मी पत्रिका में सब एडिटर और एंकर पत्रकारिता में 7 वर्ष का अनुभव. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी दैनिक अखबार में इंटर्न के तौर पर की. पंजाब केसरी की न्यूज़ वेबसाइट में बतौर न्यूज़ राइटर 5 सालों तक काम किया. किताबों की शौक़ीन...