Summary: ओटीटी ने फिल्म देखी ओर मन बदला...
गोवा में हुए 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के मास्टरक्लास सत्र में चोपड़ा ने एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक बड़ा ओटीटी प्लेटफॉर्म उनसे हुई डील से पीछे हट गया था।
12th Fail OTT Deal: फ़िल्मकार विदु विनोद चोपड़ा कभी परिंदा और 1942: ए लव स्टोरी जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते थे, लेकिन आज की नई पीढ़ी उन्हें 12th फेल के निर्देशक के रूप में पहचानती है। विक्रांत मैसी की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म को हाल ही में दो राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले। हाल ही में गोवा में हुए 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के मास्टरक्लास सत्र में चोपड़ा ने एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक बड़ा ओटीटी प्लेटफॉर्म उनसे हुई डील से पीछे हट गया था। वजह यह बताई गई कि उनके पास फिल्म खरीदने के लिए “पैसे नहीं हैं”। चोपड़ा के मुताबिक, जिस ओटीटी ने शुरुआत में फिल्म लेने की इच्छा जताई थी, वह फिल्म देखकर ही पीछे हट गया और बहाना बनाकर बोला कि “फंड्स कम हैं”।
थिएटर में रिलीज मत करो
लेखक अभिजात जोशी के साथ हुए इस सत्र का विषय था, “अनस्क्रिप्टेड: द आर्ट एंड इमोशन ऑफ फिल्ममेकिंग”। बातचीत के दौरान चोपड़ा ने खुलकर बताया कि कैसे 12th फेल को ओटीटी से कोई डील नहीं मिली, क्योंकि प्लेटफॉर्म का दावा था कि उनके पास इस फिल्म के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने, जिनमें उनकी पत्नी अनुपमा चोपड़ा भी शामिल थीं, उनसे कहा था कि फिल्म को थिएटर में रिलीज़ मत करो क्योंकि कोई देखने नहीं आएगा।
चोपड़ा के अनुसार, “जब मैंने 12th फेल बनाई, तो सबने कहा कि यह एक दिन भी नहीं चलेगी। मेरी पत्नी, जो सिनेमा को बहुत समझती हैं, उन्होंने भी कहा कि इसे थिएटर में मत डालो, न तुम्हारी फिल्म चलेगी न विक्रांत की। मैंने कहा था कि हमने इसे प्यार से बनाया है, लोग जरूर आएंगे। और हुआ भी वही… फिल्म सात महीने तक थिएटर में लगी रही, जबकि बीच में टीवी और डिजिटल पर भी आ चुकी थी।”
ऐसे लोग भी हैं दुनिया में…

चोपड़ा ने ओटीटी प्लेटफॉर्म का नाम नहीं बताया, लेकिन उनकी बातों से साफ़ था कि उन्हें इस रवैये से निराशा हुई। उन्होंने कहा, “मेरी एक ओटीटी कंपनी से डील थी। उन्होंने फिल्म देखी और बोले— ‘हमारे पास फंड्स नहीं हैं।’ सोचिए! उन्होंने मुझसे ऐसा कहा। मैंने कहा शायद उन्हें फिल्म समझ नहीं आई। एक ने तो यहां तक कह दिया, ‘ऐसे लोग तो हैं ही नहीं अब, सर।’ यानी उसे लग रहा था कि आजकल इतनी ईमानदारी वाले लोग मिलते ही नहीं। मैंने हंसकर कहा, ‘मुझे नहीं पता दुनिया में कितने हैं, पर एक तो आपके सामने बैठा है!’”
12th फेल की ईमानदारी और सच्चाई ही सबकुछ
बातचीत के दौरान विदु विनोद चोपड़ा ने फिल्म की शूटिंग का भी एक यादगार अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब फिल्म में विक्रांत का किरदार अपने गांव लौटता है और पता चलता है कि उसकी दादी का निधन हो गया है, उस दृश्य को शूट करते समय सेट पर बेहद भारी माहौल था। वे बताते हैं, “कुछ भी प्लान नहीं था। सबकुछ अपने-आप बहता चला गया। हमने उस सीन का सबसे लंबा टेक चार मिनट बीस सेकंड तक चलाया। अगर हम बीच में ‘कट’ बोल देते तो उस दृश्य की असली भावना टूट जाती। सभी लोग पूछते रहे कि हमने इतना लंबा टेक कैसे लिया।” फिल्म में विक्रांत मैसी के साथ मेधा शंकर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में थीं। विदु का मानना है कि 12th फेल की सच्चाई और ईमानदारी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
