Overview: K-Pop सहयोग पर गुरु रंधावा का बेबाक बयान
गुरु रंधावा ने K-Pop पर कहा कि भारत में अभी लोग इसे ज्यादा नहीं जानते। फिलहाल उन्हें कोरियन संगीत के साथ कोई बड़ा सहयोग नहीं दिख रहा है।
Guru Randhawa on K-Pop: पंजाबी संगीत जगत के जाने-माने नाम, गुरु रंधावा ने हाल ही में कोरियन संगीत (K-Pop) और उसके साथ किसी भविष्य के सहयोग को लेकर अपनी राय साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्हें कोरियन संगीत के साथ किसी भी तरह का कोई बड़ा जुड़ाव नहीं दिख रहा है।
K-Pop पर गुरु रंधावा की बेबाक राय
हाल ही में एक कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए गुरु रंधावा ने K-Pop के बढ़ते क्रेज पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लग रहा कि भारत में अभी ज्यादा लोग K-पॉप म्यूजिक को जानते-समझते नहीं हैं।” उनका मानना है कि जहाँ K-Pop ने वैश्विक स्तर पर अपनी एक पहचान बनाई है, वहीं भारतीय दर्शकों के बीच अभी इसकी उतनी गहरी पैठ नहीं बन पाई है जितनी अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगीत शैलियों की है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और गुरु रंधावा का दृष्टिकोण
गुरु रंधावा हमेशा से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के लिए खुले रहे हैं। उन्होंने अतीत में अमेरिकी रैपर पिटबुल और द चेन्समोकर्स जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया है, जिससे भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान मिली है। उनका हालिया एल्बम “Without Prejudice” भी इस बात का प्रमाण है कि वह अपने संगीत में अंतर्राष्ट्रीय तत्वों को शामिल करने से पीछे नहीं हटते। हालांकि, K-Pop के साथ सहयोग को लेकर उनका यह बयान कि “मुझे नहीं लग रहा…” दिखाता है कि वह हर अंतर्राष्ट्रीय अवसर पर तुरंत कदम नहीं बढ़ाते, बल्कि दर्शकों की पसंद, संगीत की प्रासंगिकता और सांस्कृतिक तालमेल को भी ध्यान में रखते हैं।
भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का लक्ष्य
गुरु रंधावा का एक बड़ा लक्ष्य भारतीय संगीत को विश्व स्तर पर ले जाना है। वह चाहते हैं कि भारतीय कलाकार केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय कलाकारों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “दृश्यता” बढ़ी है और अब उन्हें वैश्विक स्तर पर अधिक अवसर मिल रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कलाकार भी भारत के संगीत परिदृश्य को समझते और सराहते हैं। उनका यह दृढ़ विश्वास है कि पंजाबी संगीत ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि इसकी “समझने में आसानी” ने इसे लंबे समय तक संगीत प्रेमियों का प्यार दिलाया है।
संक्षेप में, गुरु रंधावा K-Pop की वैश्विक पहुंच को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि भारतीय दर्शक अभी भी इससे पूरी तरह से परिचित नहीं हैं, और इसलिए फिलहाल कोरियन संगीत के साथ कोई बड़ा सहयोग उनके एजेंडे में नहीं है।
