फिल्म के प्रमोशन के दौरान तापसी ने बात करते हुए कहा, ‘ मैं भी दिल्ली में ही पली-बढ़ी हूं और जानती हूं कि यहां ईव टीजिंग रोज़ की बात है। रोड पर चलते हुए, बसों में सफर करते हुए, कहीं किसी बड़े फेस्टिवल के दौरान लोग लड़कियों को छूने की कोशिश करते हैं। ये चीज़े मैंने भी कई बार फेस किया है। बड़े होते-होते तो आदत-सी हो गई थी और पता होता था कि हां, यहां ऐसा हो सकता है।’ ये बताते हुए कि वो एक सिख परिवार से हैं तापसी कहती हैं, ‘ मुझे याद है गुरुनानक जी के वर्षगांठ पर गुरुपर्व के दौरान हर साल ऐसा कोई वाक्या मेरे साथ जरूर होता था। जब मैं 14-15 साल की हुई तो गुरुपर्व के दौरान इतनी सतर्क थी कि कोई मुझे छू न दे। इसलिए मैं अपना हाथ पीछे की ओर ही रखकर चल रही थी। हमेशा कि तरह किसी ने मुझे छूने की कोशिश की तो मैंने उसका हाथ रोक दिया, लेकिन उस वक्त इतनी नर्वस थी कि पलट कर उसका चेहरा देखने की कोशिश मैं नहीं कर सकी।’ 

छेड़-छाड़ के पीछे लड़कियों को गलत ठहराने की समस्या से भी तापसी गुजर चुकी हैं। दो कहती हैं, ‘ मेरे घर में भी मेरे पैरेन्ट्स खासतौर से मेरे डैड को भी लगता था कि मैंने ऐसे कपड़े क्यों पहने हैं। स्लीवलेस, शॉर्ट्स या बैकलेस पहनने पर मेरे घर में भी बहुत ऐतराज किया जाता था और मैं सोचती थी कि मैंने क्या गलती कर दी है।’

 

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