शमा की ज़िंदगी एक फ़ुल सर्कल की तरह वापस उसी मोड़ पर आ गई है जहाँ वे उसे छोड़ गई थी । जब वे अपने कारियर के पीक पर थी तभी शमा ने टी वी की इस रंगीन दुनिया को छोड़ दिया था। “ये मेरी लाइफ़ है” सीरियल दर्शक आज भी नहीं भूले हैं। अब जब शमा सोसायटी के लिए कुछ करना चाहती है तब उन्होंने अपने पहले होम प्रोडक्शन के द्वारा “अब दिल की सुनो “टाइटल की पाँच शॉर्ट फ़िल्म्ज़ बनाई है, जो उन की ही लाइफ़ से प्रेरित हैं ।
शमा की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी
अनजान थी अपनी बीमारी से
मैं बाइपोलर नामक बीमारी की शिकार हूं। ये एक प्रकार का डिप्रेशन है जिसके कई कारण होते है । हर इंसान के अंदर बहुत सारा कचरा भरा होता है, ज़िंदगी में बचपन से लेकर बड़े होने तक कई बातें होती है जो हमारी आत्मा को चोट पहुँचती है, हमारा अन्तर मन उन बातों से अनजाने में ही दुखी होता रहता है ।
मैं मानती हूँ कि हर बच्चे की सोच अलग होती है । मैं बचपन से ही थोड़ी ज़्यादा सेन्सिटिव थी। मुझे लगता था कि कोई मुझे प्यार नहीं करता । बचपन से ही मैं लोन्ली थी, मेरा कोई दोस्त नहीं था। मैं अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करती थी फ़्रेंड्ज़ बना ने के लिए लेकिन पता नहीं क्यूं मेरे से कोई दोस्ती नहीं करना चाहता था । मुझे मेरे पेरेन्ट्स ने हमेशा से शेयरिंग और केयारिंग की शिक्षा दी थी किंतु जब दूसरे बच्चे वैसा बिहावे नहीं करते थे तो मैं अनजाने में ही हर्ट हो जाती थी ।
आज हर कोई मेरी सुन्दरता की तारीफ़ करता है, तब मुझे लगता था कि शायद मैं ब्यूटिफ़ुल नहीं हूँ इसलिए मेरे दोस्त नहीं है ।
ग्लैमर वर्ल्ड में भी रही इंट्रोवर्ट
अपने टी वी सीरियल के दौरान भी मेरे ज़्यादा दोस्त नहीं थे ,मेरे इंटरोवर्ट स्वभाव को लोग मेरा ऐटिटूड समझ लेते थे। उस वक़्त भी मैं अपने आप को बेहद अकेला महसूस करती थी । मेरी ज़िंदगी में जो बॉय फ़्रेंड्ज़ भी आए, उनके साथ भी रेलेशनशिप ज़्यादा नहीं चल सकी। जाने अनजाने मेरे साथ के लोग भी ऐसी बातें बोल देते थे जो मुझे हर्ट करती थी।
जब सुसाइड की ओर बढ़ गए कदम
एक समय ऐसा भी आया जब आप इमेजिन करिए कि रोज़ सुबह उठ कर आपको वाश रूम जाने का भी मन ना हो किसी से बात करना तो दूर, ब्रश करना भी अच्छा ना लगे मैं ऐसे ही दौर से गुज़री हूँ ।
एक दिन तो मैंने आत्माहत्या की भी कोशिश की, मैं इस सेल्फ़िश वर्ल्ड से दूर जाना चाहती थी, मेरी अम्मी क़ुरान पढ रही थी और मैंने उनसे कहा कि मैं सोने जा रही हूं, मुझे उठाना नहीं और मैंने ख़ूब सारी स्लीपिंग पिल्ज़ खा ली लेकिन मैं अपने जिम्मेदारी के अहसास को नहीं भूली और अपने भाई को सारे अकाउंट्स व पास वर्ड का डिटेल मेसिज कर दिया। उसे समझ आया कि कुछ गड़बड़ है और सब लोग ने मिल कर मुझे बचा लिया। ये सुसाईडल कंडिशान डिपरेशन की वजह से ही आती है ।
डॉक्टर बॉय फ्रेंडने समझा स्थिति
मैं शुक्र गुज़ार हूँ अपने अमेरिकन डॉक्टर बॉय फ्रेंड का जिसने मुझे बताया या जो ये समझ सका कि मुझे बाइपोलर डिसीज है। शुरू में मैं ये मानने को तैयार नहीं थी और डॉक्टर के पास जाने में भी हिचकिचा रही थी, किंतु उसके कंविन्स करने पर मैं डॉक्टर से मिली और अब सच में खुद को मैं ख़ुशनसीब मानती हूँ कि मेरी डॉक्टर ने ये समझा कि मुझे मेडिसिन से ज़्यादा मेडीटेशन की ज़रूरत है ।
अब हूं खुश
इस वक़्त मैं अपने बॉय फ़्रेंड के साथ लिव इन रेलेशन शिप में हूँ। मैं ख़ुश हूँ, हर इंसान को प्यार की ज़रूरत है। हां मैंने अभी शादी नहीं करी है और मुझे ये सेटल डाउन वर्ड भी बहुत ख़राब लगता है। क्या कोई लड़की लाइफ़ में तभी सेटल मानी जाती है जब वो शादी करे । इस दुनिया में सच्चा दोस्त मिलना भी मुश्किल होता है। अब मैं अपने सभी एक्स बॉय फ़्रेंड्ज़ के साथ कांटैक्ट में हूं, सब से दोस्ती रखने की कोशिश करती हूँ ।
वैसे ये मेरी लाइफ है का प्रसारण टीवी पर साल 2005 में हुआ था। तब से अब तक शमा काफी बदल गई हैं और उनके फैन्स शायद ही उन्हें एक नज़र में पहचान पाएंगे।
चाहती हूं बाइपोलर के बारे में बढ़े जागरुकता
मैं अपने शॉर्ट फ़िल्म्ज़ के माध्यम से ये मेसिज देना चाहती हूँ कि अगर आप में बाइपोलर डिसिस के कोई भी लक्षण नज़र आते हैं, तो प्लीज़ उसे इग्नोर ना करे । जल्दी से जल्दी अपने डॉक्टर से मिले । मैं कोई डॉक्टर नहीं हूँ लेकिन कम से कम मैं इस बारे में आवेयेरनेस तो दिखा सकती हूँ । ये दुनिया बहुत ख़ूब सूरत है ।मुझे लगता है कि ईश्वर ने मुझे दूसरा जनम दिया है और ये मेरी भी ड्यूटी है कि मैं सोसायटी के लिए कुछ करूँ और इसी वजह से मैंने अब “दिल की सुनो “शॉर्ट फ़िल्म्ज़ बनाई है जिनमे बेहद सेन्सिटिव इशूज़ सूसाइड, डिपरेशन आदि को हाई लाइट किया है और यही वजह है कि आज मैं आपकी मैगज़ीन “गृहलक्ष्मी” के माध्यम से आपने रीडर्ज़ को अपने दिल की बात सुना रही हूँ ।
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