पसीना आना अथवा पर्सपिरेशन शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे तपती गर्मी में भी शरीर को ठंडक मिलती है जिससे शरीर का तापमान नियंत्रण में रहता है। अधितर लोगों को सामान्य मात्रा में पसीना आता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें अत्यधिक पसीना आता है। कुछ लोगों की पसीने की ग्रंथियां ज्यादा सक्रिय होती हैं, यह एक सिंड्रोम होता है,जिसे हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। इसकी वजह से असहज तो महसूस होता ही है, शरीर से दुर्गंध आने की समस्या भी होती है। इससे अक्सर व्यक्ति अन्य लोगों से दूर रहने लगता है और आत्मविश्वासकम हो जाता है। इस समस्या को कम करने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए बार-बार नहाते हैं, कुछ लोग अपनी डाइट में बदलाव करते हैं, कैफीन, अल्कोहल और मसालों का इस्तेमाल करते हैं तो अधिकतर लोग डियोडरंट अथवा एंटी-पर्सपिरंट का इस्तेमाल भी करते हैं। अंडरआर्म में अत्यधिक पसीना आने की समस्या से निजात के लिए कुछ लोग बोटॉक्स का भी सहारा लेते हैं। प्योरिफाइड बोटुलिनम टॉक्सिन की मामूली मात्रा इंजेक्शन से अंडआर्म में दिया जाता है, जिससे पसीना लाने वाली नर्व्ज अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसे में 4 से 6 महीने के लिए पसीने की समस्या से राहत मिल जाती है।
डियोडरंट या एंटी-पर्सपिरेंट्स? :- क्या आप जानते हैं डियोडरंट और एंटी-पर्सपिरेंट में अलग-अलग संयोजन होता है और इनका इस्तेमाल भी अलग-अलग होता है? एंटीपर्सपिरेंट ऐसे डियोडरंट होते हैं जो पर्सपिरेशन बंद करने के लिए पसीने की ग्रंथियों पर काम करते हैं। दूसरी ओर, डियोडरंट अंडरआर्म की दुर्गंध रोकता है क्योंकि इसमें खुशबू होती है और त्वचा पर दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकने वाले एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं। तो आपको एंटी-पर्सपिरेंट की जरूरत है अथवा डियोडरंट की, यह बात आपके शरीर की जरूरत पर निर्भर करती है। अगर आपको अत्यधिक मात्रा में पर्सपिरेशन नही होता है, बावजूद इसके आपको पसीने की दुर्गंध परेशान करती है तो आपके लिए डियोडरंट सही चुनाव हो सकता है। दूसरी ओर, अगर आपको अत्यधिक पसीने के साथ दुर्गंध की समस्या होती है तो आापके लिए एंटी-पर्सपिरेंट सही चुनाव हो सकता है।

स्टिक अथवा स्प्रेः – यह आपकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर है। जो लोग डियोडरंट को सीधे त्वचा पर लगाना पसंद करते हैं वे अक्सर स्टिक लेना पसंद करते हैं। वहीं कुछ लोग डियोडरंट को शर्ट पर स्प्रे करना पसंद करते हैं, तो उन्हें स्प्रे बेहतर लगता है। दोनों का इस्तेमाल आसान होता है। हालांकि, कई बार स्टिक आपके कपड़ों पर धब्बे छोड देती हैं, खासतौर से तब जब आपकी ड्रेस का रंग गाढ़ा हो।
रखें इन बातों का ध्यानः- क्या आप सही डियोडरंट का इस्तेमाल कर रहे हैं? क्या आप यह जानते हैं कि जो उत्पाद आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें कौन से तत्व इस्तेमाल हुए हैं और इनका आपकी त्वचा पर क्या असर हो सकता है? अगर नहीं जानते तो हम बताते हैं कि डियो का इस्तेमाल करते समय इन बातों का खास ध्यान रखें-
हानिकारक केमिकल से रहें दूर :- एल्युमिनियम कंपाउंड जैसे कि एल्युमिनियम क्लोराइड वाले डियोडरंट कुछ लोगों की त्वचा में इरिटेशन और एलर्जिक रिएक्शन की वजह बन सकते हैं। डियोडरंट में काफी मात्रा में अल्कोहल भी होता है,जो संवेदनशील त्वचा पर बुरा असर डाल सकता है। मंत्रा मेडिस्पा की डर्मेटोलॉजिस्ट इंदू बालानी कहती हैं कि इसमें अन्य हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं पैराबींस-यह एक तरह का कृत्रिम प्रिजर्वेटिव है जिसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में काफी ज्यादा मात्रा में होता है। ऐसी आशंका जताई गई है कि इस केमिकल से स्तन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।डियोडरंट में इस्तेमाल होने वाले जिन अन्य केमिकलों की जांच और इनसे बचने की जरूरत होती है वे हैं, प्रॉपलीन ग्लायकोल, ट्राइक्लोजन, ट्राइथेनोलामाइन और आर्टिफिशल रंग। बेहतर है कि आप अल्कोहल-फ्री डिडयोडरंट चुनें।

संवेदनशील त्वचा है तो तेज खुशबू से करें परहेज :– हर किसी के लिए आर्टिफिशल खुशबू अच्छी नहीं होती। अधिकतर डियोडरंट में अल्कोहल के साथ खुशबू वाले ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी कुछ खुशबुएं त्वचा पर कॉस्मेटिक एलर्जी की वजह बन सकती हैं। तो अगर आपको खुशबू से एलर्जी है तो मंद खुशबू वाले डियोडरंड चुनें और डियोडरंट को त्वचा पर छिड़कने के बजाय कपड़ों पर छिड़कें।
