तेज़ी से फैल रहे कोरोना वायरस को रोकने के लिए भारत में 3 मई तक के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है। वहीं, सरकार ने एग्जिट प्‍लान के तहत देश के राज्यों को कोरोना संक्रमण के आधार पर 3 ज़ोन में बांटा हैं जिसमें रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन हैं। आइए जानते हैं कि क्‍या हैं लॉकडाउन के दौरान लगाए गए ये रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन—

दरअसल, देश को तीन ज़ोन में बांटने का काम अलग-अलग राज्‍यों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्‍या के आधार पर किया जाएगा। जिससे सरकार यह तय कर सके कि किन-किन राज्यों व शहरों में कोरोना वायरस का कितना खतरा है।

रेड ज़ोन–

कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को ‘रेड कोड’ दिया गया है यानी ऐसे लोग घर से बाहर नहीं निकलेंगे। ‘रेड जोन’ वाले हिस्‍सों में कोई गतिविधि नहीं होगी। इसमें उन इलाकों को शामिल किया जाएगा जहां कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस बहुत ज्‍यादा समाने आए हैं।
 
जिन इलाकों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया है और फिर भी उनमें नए मामले सामने आ रहे हैं तो उन्‍हें भी रेड जोन में रखा जा सकता है। ऐसे इलाकों में लोगों को लॉकडाउन का सख्‍ती से पालन करना होगा यानी बहुत जरूरी काम से ही घर से निकलने की छूट रहेगी।

ऑरेंज ज़ोन–

‘ऑरेंज कोड’ वालों को सिर्फ शहर में ही निकलने की अनुमति दी गई है। इसमें उन जगहों को रखा जाएगा, जहां पॉजिटिव केस आए थे लेकिन पिछले कुछ दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया उन्‍हें ‘ऑरेंज जोन’ में रखा जाएगा।

ऐसे इलाकों में फसल की कटाई समेत कुछ गतिविधियों की छूट रहेगी। हालांकि, मजदूर उसी इलाके के ही काम पर लगाए जा सकेंगे. बाहर के इलाकों से मजदूरों के बाने पर पाबंदी रहेगी।

ग्रीन ज़ोन–

लॉकडाउन हटाए जाने के बाद ‘ग्रीन कोड’ वाले लोग शहर में घूमने के साथ ही बाहर भी जा सकते हैं। ग्रीन जोन में ऐसे जिले रहेंगे जिनमें अब तक कोई पॉजिटिव केस नहीं आया है। ऐसे इलाके में लोगों को बाकी दोनों के मुकाबले ज्‍यादा छूट रहेगी। ग्रीन जोन इलाकों में छोटे और मझोले उद्योग-धंधे अपना काम शुरू कर पाएंगे।

हालांकि, काम शुरू करने वाले उद्योगों को कर्मचारियों की रहने की व्यवस्था परिसर में ही करनी होगी। वहीं, लोग अपने जरूरी कामों के लिए बाहर निकल सकेंगे। इन इलाकों के लोग अपने क्षेत्र में घूम सकेंगे लेकिन बाहर के लोग अंदर नहीं आएंगे।