संपत्ति के नाम पर, तीन नीम के पेड़ थे जो बाबू राजेंद्र प्रसाद के हिस्से आए थे। हिस्से आए ये कहना शायद गलत होगा बल्कि उन्हें दिए गए थे। हिस्सा तो तब होता जब कोई बांट-बखरा होता, पर मुकदमे की गुंजाइश बनती, पंचायत बैठती या गांव में बड़े-बुजुर्ग बीच-बचाव कर किसी मान्य निर्णय पर पहुंचने […]
