Posted inरवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानियाँ, हिंदी कहानियाँ

दहेज – रवीन्द्रनाथ टैगोर

पाँच लड़कों के बाद जब एक कन्या का जन्म हुआ, तब माँ-बाप ने बड़े लाड़ से उसका नाम निरुपमा रखा। इसके पहले इस समाज में ऐसा शौक़ीन नाम कभी किसी ने सुना नहीं था। प्रायः देवी-देवताओं के नाम ही प्रचलित थे‒गणेश, कार्तिकेय, पार्वती इसके उदाहरण हैं। अब निरुपमा के विवाह की बातचीत चल रही है। […]

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आंख की किरकिरी – रवीन्द्रनाथ टैगोर

आंख की किरकिरी  उपन्यास : एक परिचय रबीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखी गई “आंख की किरकिरी” एक उपन्यास है जो जीवन के प्रति संवेदनशीलता और सांस्कृतिक उत्थान की महत्वपूर्ण कथा प्रस्तुत करता है। कथा का मुख्य पात्र निलाद्रि है, जो एक गरीब गांव में अपने परिवार के साथ रहता है। निलाद्रि की विशेषता यह है कि […]

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अतिथि – रवीन्द्रनाथ टैगोर

काँठालिया के ज़मींदार मतिलाल बाबू सपरिवार नौका से अपने घर जा रहे थे। रास्ते में दोपहर के समय नदी किनारे की एक मंडी के पास नौका बाँधकर भोजन बनाने का आयोजन कर ही रहे थे कि इसी बीच एक ब्राह्मण बालक ने आकार पूछा, बाबू, तुम लोग कहाँ जा रहे हो?” प्रश्नकर्ता की आयु पंद्रह-सोलह […]

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