Hindi Story: दीवाली को कुछ ही दिन बाकी थे। कितना कुछ करना बाकी था,घर की साफ-सफाई, पेंटिंग, नए कपड़े, मिठाई और न जाने कितने सारे पकवान…साल भर का त्योहार था ऐसे कैसे छोड़ दे। सोच-सोच कर नम्रता का सिर दर्द हो रहा था। वह सोच रही थी, कैसे होगा यह सब रोजी-रोटी की वजह से […]
Author Archives: रंजना जायसवाल
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“ऑनलाइन खाना”-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Story in Hindi: पिताजी के इस दुनिया से जाने के बाद माँ का आना-जाना लगा ही रहता था। प्रिया उनकी इकलौती संतान थी,पिताजी के जाने के बाद माँ एकदम अकेली पड़ गई थी। घर का कोना-कोना पिता जी के साथ बिताए मधुर पल की याद दिलाता रहता,जब माँ घर के अकेलेपन से डरने लगती तो […]
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खोमचें भर मुहब्बत-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi ki kahani : फरवरी की गुलाबी ठंड कहीं दूर रेडियो पर लता जी के प्यार भरे नगमों की मंद स्वर लहरी हवा के पंखों पर सवार होकर खिड़की से आ रही थी। खिड़की से झांकती चाँदनी और सफेद चाँद की रौशनी से झोपड़ी नहा उठी। शांति ने न जाने क्या सोचकर खिड़की के परदों […]
