कुऽऽऽहू……कुऽऽऽहू……अंधियारे सन्नाटे को चीरती कोयल की सुरीली आवाज। रमा ने करवट ली। पंचम सुर से विचारों का सिलसिला टूटा। नींद नहीं टूटी। टूटती कैसे? आँखों से नींद ने दुश्मनी जो कर रखी है! सच है कहावत, ‘सबके पाका हा सुहाथे, आदमी के पाका ह नई सुहावय, कोनो ल!’ फल हों, साग-भाजी या अन्न। इनका पका […]
