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दुपट्टे की गांठ – गृहलक्ष्मी श्रेष्ठ कहानी

Hindi Best Story: सुधा को उस पल अपनी मां की याद आ गई। वह बहुत छोटी थी जब मां चल बसी थीं। तब वह आठ साल की थी। कभी-कभी जिंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी औरत के मुंह से मिलते हैं। सुधा […]

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चार बजे की मां-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: सुबह के चार बजे थे। बाकी दुनिया नींद में थी, लेकिन प्रियंका की नींद मानो अपराधबोध से भरी हुई टूट गई थी। अलार्म तीन बार बज चुका था, पर थकी हुई आँखों में जैसे समय का कोई मोल नहीं रह गया था। वह उठी — हड़बड़ाई नहीं, बस चुपचाप उठ गई। सौरभ, उसका पति, […]

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