आंखों में आंसुओं का सैलाब बार-बार उमड़ रहा था। सीने की घुटन और सिसकियां रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। यह सब तो फिल्मों में ही होता है। हकीकत में कहीं ऐसा होता है। महक सोच रही थी पापा ने इस बात की भनक भी नहीं लगने दी। आज तक मुझे पता ही […]
Author Archives: गीता उपाध्याय
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माता-पिता हैरान थे-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
“अरे यार अंकुर आज तो मज़ा आ गया! साईकिलिंग में, तेरी साईकिल तो बड़ी मस्त है। सचिन थोड़ी देर और रोक ले अंकुर को” रोहित बोला – “अभी तो घर जाने का दिल भी नहीं कर रहा थोड़ी देर और खेलते हैं। अभी तो बहुत टाइम है अंधेरा होने में अंकुर कौन सा तेरे पापा […]
