Overview: किन्हें नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका
धार्मिक परंपरा और मान्यता है कि, गर्भवती महिला, नवजात शिशु, नवविवाहित और जिनकी कुंडली में उग्र ग्रह दोष हों, उन्हें होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए।
Holika Dahan 2026: होली से एक दिन पहले होने वाले होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद लोग विधि-विधान से होलिका पूजन और फिर दहन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अग्नि नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि लाती है। लेकिन शास्त्रों और लोक परंपराओं में ऐसा भी कहा जाता है कि, कुछ लोगों को जलती हुई होलिका को सीधे नहीं देखना चाहिए, वरना शारीरिक, मानसिक या पारिवारिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। जानें किन्हें नहीं देखनी चाहिए होलिका दहन की अग्नि।
होलिका दहन 2026 कब होगी
इस साल होली का त्योहार 4 मार्च 2026 को रहेगा। लेकिन होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी है और इसका कारण है होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का लगना और भद्रा का रहना। ग्रहण और भद्रा काल इन दोनों ही समय में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों की माने तो 3 मार्च को शाम होलिका दहन 06 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 08:50 मिनट तक होलिका दहन किया जा सकता है।
किन्हें नहीं देखना चाहिए होलिका दहन

गर्भवती महिलाएं – धार्मिक मान्यता है कि गर्भवती महिलाओं को जलती हुई होलिका से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। गर्भवती महिला को होलिका की पूजा या परिक्रमा भी नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि तेज अग्नि और नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाएं होलिका दहन के समय घर के भीतर रहकर भगवान का स्मरण करें।
नवजात शिशु और छोटे बच्चे– नवजात शिशु या बहुत छोटे बच्चों को भी जलती हुई होलिका नहीं दिखानी चाहिए। होलिका दहन के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक रहता है और छोटे बच्चों की ऊर्जा व आभामंडल को कोमल माना जाता है। इसलिए लोक परंपराओं के अनुसार बच्चों को जलती होलिका नहीं दिखानी चाहिए।
कुंडली में ग्रह दोष हों- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु, शनि या मंगल का उग्र प्रभाव हो, उन्हें जलती होलिका को देर तक नहीं देखना चाहिए। माना जाता है कि अग्नि तत्व इन ग्रहों के प्रभाव को और बढ़ा सकता है, जिससे मानसिक तनाव, विवाद या स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है। ऐसे जातक दूर से प्रणाम करें और अग्नि में नारियल या गेहूं अर्पित कर शांति की प्रार्थना करें।
नवविवाहित महिलाएं– धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन महिलाओं की न-नई शादी हुई हो या शादी के बाद पहली होली हो, उन्हें भी जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि नवविवाहिता द्वारा इसे देखना उसके वैवाहिक जीवन में कलह और दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। कुछ परंपराओं में ऐसा भी माना जाता है कि, होलिका कि अग्नि सास और बहू को एक साथ जलते हुए नहीं देखनी चाहिए।
होलिका दहन पर क्या करें

- होलिका दहन से पहले होलिका की विधिपूर्वक पूजा करें और प्रह्लाद का स्मरण करें।
- पूजा के दौरान होलिका की 5 या 7 बार परिक्रमा करें और जलती हुई होलिका में धान-गेहूं की बालियां डालें।
- जलती होलिका की राख को अगले दिन शुभ मानकर तिलक के रूप में लगाना चाहिए। कुछ लोग इस राख को एक पोटली में बांधकर रखते हैं।
