Overview:सर्दियों में नालंदा घूमने के 5 स्पेशल कारण, जानिए क्यों बनाएं इसे अपनी ट्रिप लिस्ट
सर्दियों में नालंदा घूमना एक अनोखा अनुभव है। यहाँ की शांत सुबह, हल्की धुंध, पुराने खंडहर और मिट्टी की खुशबू आपको सुकून देती हैं। नालंदा का इतिहास, आधुनिक विश्वविद्यालय, राजगीर की पहाड़ियाँ और गरम झरने, साथ ही मिट्टी की चाय और लिट्टी-चोखा, इस यात्रा को यादगार बनाते हैं। यह जगह ज्ञान, शांति और प्राकृतिक सुंदरता का बेहतरीन संगम पेश करती है।
Nalanda Winter Travel: अगर आप सर्दियों में ऐसी जगह घूमने का सोच रहे हैं जहाँ शांति भी मिले और कुछ नया सीखने को भी, तो बिहार का नालंदा एकदम परफेक्ट जगह है। यहाँ की ठंडी हवा, पुराने खंडहर, गरम चाय और शांत माहौल हर ट्रैवलर को रिलैक्स फील देते हैं।
नालंदा सिर्फ एक पुराना शहर नहीं है, बल्कि कभी ये दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र हुआ करता था। आज भी यहाँ की मिट्टी में वो एहसास है — जहाँ कभी एशिया भर से छात्र, विद्वान और monks साथ में बैठकर बातें करते होंगे। सर्दियों में जब यहाँ हल्की धुंध छाती है और हवा में मिट्टी की खुशबू घुलती है, तो ये जगह और भी खूबसूरत लगती है।
अगर आप भीड़भाड़ से दूर जाकर थोड़ा वक्त खुद के साथ बिताना चाहते हैं, तो नालंदा का ट्रिप सर्दियों में जरूर करना चाहिए। तो चलिए जानते हैं 5 ऐसे कारण जो सर्दियों में नालंदा घूमने को एकदम स्पेशल बना देते हैं।
ज्ञान और इतिहास का अनमोल केंद्र

नालंदा दुनिया के सबसे पुराने और बड़े शिक्षा केंद्रों में से एक माना जाता है। यहाँ कभी विद्वान और छात्र दूर-दूर से पढ़ाई करने आते थे। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय में हजारों छात्र रहते थे । इसकी ईंटों की इमारतें, पुस्तकालय और शांति भरा माहौल आज भी इसकी प्रतिष्ठा बताते हैं। नालंदा सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति का प्रतीक है। यह जगह इतिहास के पन्नों से सीधे जुड़ी हुई है, और आने वाले हर यात्री को पुराने समय की महानता का अहसास कराती है।
नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल

(21 से 25 दिसंबर 2025)-इस सर्दी नालंदा में पहली बार लिटरेचर फेस्टिवल होने वाला है, जो बिहार के लोगों के लिए बहुत खास है। इसे कुछ ऐसे लोगों ने मिलकर बनाया है जो नालंदा की संस्कृति और पहचान से बहुत जुड़ाव रखते हैं। पाँच दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में देश-विदेश से लेखक, कलाकार और विचारक आएंगे। यहाँ बातचीत होगी, किताबों की रीडिंग होगी, आर्ट शो और परफॉर्मेंस भी होंगे। ये मौका नालंदा के लिए गर्व का होगा, जब इसका पुराना इतिहास और आज का जोश, दोनों एक साथ नजर आएंगे।
नया नालंदा विश्वविद्यालय

नया नालंदा विश्वविद्यालय, जो 2010 में विदेश मंत्रालय ने बनाया था, उसी पुरानी नालंदा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। ये एक बहुत अहम संस्थान है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे देखकर पुराने नालंदा की झलक महसूस होती है। यहाँ के खुले लॉन, लाल ईंटों की खूबसूरत बिल्डिंग्स और लंबे-लंबे रास्ते देखकर लगता है कि इस मिट्टी से सीखने की भावना आज भी ज़िंदा है। यहाँ घूमते हुए ऐसा लगता है जैसे इतिहास और आधुनिकता एक साथ चल रहे हों, और हर कोना ज्ञान की नई कहानी कह रहा हो I
राजगीर की पहाड़ियाँ और गरम झरने
राजगीर की शांत पहाड़ियाँ और गरम पानी के झरने आपका इंतज़ार कर रहे हैं, जो नालंदा से थोड़ी ही दूरी पर हैं। सुबह-सुबह पानी से हल्की धुंध उठती है, और दिन चढ़ने के साथ पहाड़ों के रंग बदलते जाते हैं। यहाँ की शांति को महसूस किया जा सकता है — यह मन को सुकून देने वाली जगह है। हल्की ठंडी हवा में एक नरमी सी है, जो इस जगह को एकदम परफेक्ट गेटअवे बना देती है। यहाँ बैठकर आप पूरी थकान भूल जाएंगे और बस प्रकृति और अपने ही ख्यालों में खो जाएंगे ।
इतिहास की सैर
प्राचीन विश्वविद्यालय चुपचाप खड़ा जैसे अपनाइतिहास कह रहा हो I इसकी पुरानी दीवारें अतीत की कहानियाँ बयां करती हैं। जब सूरज की रोशनी पत्थरों पर पड़ती है, तो वे गर्म होते हुए लगते हैं, और उनकी नक्काशी और पुरानी ईंटों की खूबसूरती दिखाई देती है। यहाँ चलते हुए आप लगभग उन कदमों की गूंज सुन सकते हैं जो बहुत पहले चले थे। जगह बेहद शांत महसूस होती है, और दरारों में उगती घास इसकी सुकून भरी खूबसूरती को और बढ़ा देती है।
ध्यान रखने योग्य आसान टिप्स:
पटना से लगभग दो घंटे की सड़क यात्रा है।
ठंडी सुबह के लिए जैकेट साथ ले जाएँ।
आरामदायक जूते पहनें, क्योंकि यहाँ काफी चलना होता है।
अपनी यात्रा को और मजेदार बनाने के लिए बीच-बीच में छोटे-छोटे stop लें। इन छोटे-छोटे ब्रेक्स में नालंदा की खूबसूरती को महसूस किया जा सकता है । हर कुछ किलोमीटर पर आपको चाय की छोटी दुकानें मिल जाएंगी, जहाँ आप दोस्तों और परिवार के साथ थोड़ी चाय पी सकते हैं और बातचीत कर सकते हैं। मिट्टी के कप में गरम चाय और तवे से ताज़ा लिट्टी-चोखा या पकौड़े आपको और भी मज़ा देंगे।
नालंदा किसी दिखावे की जगह नहीं है, बस शांति और खूबसूरती से भरी हुई है। यहाँ सर्दियों में एक दिन घूमो, चलो-रुको, आस-पास देखो, और आप खुद महसूस करोगे कि कितना सुकून मिलता है।
