V. Sripathy from Tamil Nadu became the state’s first tribal woman civil judge, giving her exam just two days after giving birth. Her story is an inspiring example of courage and determination for everyone.

Summary: कौन हैं वी. श्रीपति, जिन्होंने बच्चे के दो दिन बाद परीक्षा देकर इतिहास रचा?

तमिलनाडु की वी. श्रीपति ने अपनी अद्भुत हिम्मत और मेहनत से इतिहास रच दिया है। बच्चे के जन्म के सिर्फ दो दिन बाद परीक्षा देकर वह अपने समुदाय की पहली आदिवासी महिला सिविल जज बनीं।

V Sripathi Success Story: महिलाओं के भीतर जो हिम्मत होती है, उसकी हमेशा काफी तारीफ होती है, क्योंकि इसी हिम्मत की वजह से वह सबसे मुश्किल हालात को भी आसानी से पार कर लेती हैं। खासकर जब महिला मां बनती है, तो उसकी हिम्मत और भी बढ़ जाती है। ऐसा ही एक नया उदाहरण तमिलनाडु की मलयाली जनजाति से ताल्लुक रखने वाली वी. श्रीपति ने पेश किया है, जिन्होंने अपने समुदाय की पहली महिला सिविल जज बनने का गौरव हासिल किया। अब आप सोच रहे होंगे कि श्रीपति ने ऐसा क्या किया कि लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। तो आइए जानते हैं उनकी प्रेरणादायक कहानी।

V. Sripathy became Tamil Nadu’s first tribal woman civil judge, giving her exam just two days after childbirth.
Tamilnadu First Tribal Judge V Sripathy Success Story

वी. श्रीपति तिरुवन्नामलाई जिले के जवाधु हिल्स के पास स्थित पुलियूर गाँव की रहने वाली हैं। वे मलयाली जनजाति से ताल्लुक रखती हैं और कलियप्पन और मल्लिगा की सबसे बड़ी बेटी हैं। अपनी प्रारंभिक पढ़ाई येलागिरी हिल्स में पूरी करने के बाद उन्होंने बी.ए. और एलएल.बी. की डिग्री हासिल की। कम उम्र में ही शादी के बावजूद, उन्होंने अपने परिवार के सहयोग से पढ़ाई जारी रखी और तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) की परीक्षा में शामिल होकर सफलता हासिल की। उनकी यह उपलब्धि उन्हें अपने समुदाय की पहली महिला सिविल जज बनाती है।

श्रीपति की यह उपलब्धि इसलिए भी बहुत ज्यादा खास है क्योंकि नवंबर 2023 में उनकी परीक्षा होने वाली थी और इसी दौरान उन्होंने एग्जाम से ठीक 2 दिन पहले अपने बच्चों को जन्म दिया। आम तौर पर ऐसा लगता कि हालात इतने मुश्किल हों तो किसी भी काम को पूरा करना आसान नहीं होता, लेकिन श्रीपति ने साबित कर दिया कि महिला की हिम्मत किसी भी चुनौती से बड़ी होती है। प्रसव के केवल दो दिन बाद, अपने पति, परिवार और दोस्तों के सहयोग से, उन्होंने लगभग 250 किलोमीटर की लंबी यात्रा करके चेन्नई पहुँचकर परीक्षा दी। शारीरिक और मानसिक थकान के बावजूद उन्होंने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी।

फिर परीक्षा के कुछ दिन बाद श्रीपति को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जहां वह अपने बच्चे के साथ पहुंचीं। इंटरव्यू में भी उन्होंने लिखित परीक्षा की तरह शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद वह अपने समुदाय की पहली महिला सिविल जज बनीं। उनकी सफलता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिनमें वह सफेद साड़ी पहने हुए अपने बच्चे को गोद में लिए खड़ी नजर आ रही हैं।

श्रीपति की इस बड़ी उपलब्धि पर उन्होंने बताया कि उनकी शादी काफी कम उम्र में हो गई थी, लेकिन अपने पति और ससुराल वालों के सहयोग से ही वह आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। बच्चे होने के बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपनों को पूरा किया। उनकी इस सफलता पर राज्य के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी उन्हें ट्वीट कर बधाई दी थी।

स्वाति कुमारी एक अनुभवी डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो वर्तमान में गृहलक्ष्मी में फ्रीलांसर के रूप में काम कर रही हैं। चार वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली स्वाति को खासतौर पर लाइफस्टाइल विषयों पर लेखन में दक्षता हासिल है। खाली समय...