Cyber intimacy psychology
Cyber intimacy psychology

summary; सेक्सुअल डिज़ायर का ऑनलाइन सच

ऑनलाइन चैटिंग लोगों को सुरक्षित माहौल देती है जहाँ वे अपनी सेक्सुअल डिज़ायर बिना झिझक और सामाजिक डर के तलाशते हैं।

Cyber Intimacy Psychology: वर्तमान समय डिजिटल समय है, तकनीक सिर्फ हमारे काम पर ही असर नहीं डाल रहे बल्कि हमारी भावनाओं और इच्छाओं पर भी इनका पूरा असर है। आज ऑनलाइन चैटिंग और डेटिंग एप केवल लोगों से जुड़ने या बात करने का जरिया नहीं है, बल्कि कई लोग इनका उपयोग अपने सेक्सुअल डिजायर और फेंटेसी को पूरा करने के लिए करते हैं। यहां सवाल यह है कि लोग ऐसा करते क्यों हैं? आइए जानते हैं इस लेख में आखिर क्यों लोग ऑनलाइन चैट में अपनी सेक्सुअल डिजायर पूरा करना चाहते हैं इसके पीछे कौन से साइकोलॉजिकल कारण है।

संकोच रहित वातावरण: ऑनलाइन चैट लोगों को किसी से भी बात करने की सुविधा प्रदान करता है। लोग ऐसे व्यक्ति से बात कर सकते हैं जो उन्हें जज नहीं करते, सलाह नहीं देते, ऐसे में व्यक्ति खुलकर बिना किसी संकोच के अपने सेक्सुअल डिजायर के बारे में बात कर सकता है।

फेंटेसी के बारे में बात: लोग वास्तविक दुनिया में अपने फेंटेसी को बताने या जाहिर करने में संकोच करते हैं, लेकिन ऑनलाइन चैटिंग के दौरान उन्हें एक सेफ स्पेस का अनुभव होता है जहां वह बिना डरे अपनी इच्छाएं जाहिर कर सकते हैं।

सामाजिक दबाव से बचाव: ऑनलाइन चैट के दौरान व्यक्ति सेक्स को लेकर या सेक्स से जुड़ी बातों को लेकर खुद को सामाजिक दबाव से मुक्त पता है। ऑनलाइन चैटिंग के दौरान वह जानता है उसे कोई भी सामाजिक बंधन जज नहीं कर रहा है।

Cyber intimacy psychology
Cyber intimacy psychology

इमोशनल साथ: कई बार लोगों की शारीरिक जरूरत तो पूरी होती है पर वह अकेलेपन तनाव और भावनात्मक अकेलेपन से जूझ रहे होते हैं जिसे दूर करने के लिए वह ऑनलाइन चैट का सहारा लेते हैं।

अपने अनुसार समय: ऑनलाइन चैट समय की बाध्यता नहीं लगता लोग अपने अनुसार चैट का समय तय करते हैं।

कई शोध बताते हैं ऑनलाइन चैट व्यक्ति के तनाव और अकेलेपन को कुछ समय के लिए कम कर देते हैं। हालांकि यह तरीका लंबे समय तक कारगर नहीं है अकेलेपन और एंजायटी को दूर करने का यह एक अस्थाई तरीका है।

फैंटसी और क्यूरियोसिटी: इंसान हमेशा क्यूरियोसिटी से भरा रहता है वह हर वक्त कुछ नया ट्राई करना चाहता है, कई बार सामाजिक बंधनों के कारण लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं। ऑनलाइन चैट इन्हीं फैंटसी और क्यूरियोसिटी को एक्सप्लोर करने का एक नया तरीका है। ऐसा करने से लोगों के दिमाग में डोपामिन हार्मोन रिलीज होता है जो कि उन्हें खुशी महसूस करवाता है।

रिलेशनशिप की खोज: कई लोग आत्मविश्वास की कमी के कारण वास्तविक दुनिया में रिश्ते बनाने में सहज महसूस नहीं करते इसलिए अपनी क्यूरियोसिटी और भावनाओं को शांत करने के लिए वर्चुअल रिश्तों का सहारा लेते हैं।

ऑनलाइन चैट का रिस्क: आपके प्राइवेट फोटो और वीडियो लीक होने का खतरा या उनका उपयोग कर ब्लैकमेलिंग का खतरा बना रहता है।

हो सकता है आप जिससे बात कर रहे हो वह एक स्कैमर हो जो आपकी जानकारी का गलत उपयोग करें।

अगर आप ऑनलाइन चैट करने वाले व्यक्ति से ज्यादा अटैक हो जाते हैं और वह आपको इग्नोर करें या धोखा दे तो आप भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ जाते हैं। वर्चुअल रिलेशनशिप में लंबे समय तक बने रहना वास्तविक दुनिया में आपको कमजोर बनाता है।

सावधानियां: ऑनलाइन चैट के दौरान अपने पर्सनल डिटेल्स शेयर ना करें।

किसी भी प्रोफाइल पर तुरंत भरोसा ना करें पहले उसकी पड़ताल करें।

अपने ऐसे वीडियो या फोटो शेयर ना करें जिससे आपको ब्लैकमेल किया जा सके।

अपने बैंक डिटेल्स या किसी तरीके की भी फाइनेंस से रिलेटेड डाक्यूमेंट्स या डीटेल्स ऑनलाइन चैट में शेयर ना करें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...