Anchal Bhatheja
Anchal Bhatheja

Who is Anchal Bhatheja: महिलाओं का बोलबाला लगातार जारी है। अब इसमें नया नाम जुड़ा है आंचल भठेजा का, जो भारत के सुप्रीम कोर्ट में किसी मामले को लड़ने वाली पहली नेत्रहीन महिला अधिवक्ता बन गई हैं। यह भारतीय न्यायपालिका और विकलांगता अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह खास पल 6 जून को देखने को मिला। सर्वोच्च न्यायालय में उनकी उपस्थिति लीगल प्रोफेशन में समावेशिता और प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्व कदम है।

Who is Anchal Bhatheja
Anchal Bhatheja

जन्म संबंधी जटिलताओं की वजह से कम दृष्टि के साथ जन्मी आंचल की दृष्टि बाद में समय से पहले रेटिनोपैथी के कारण पूरी तरह से खो गई। लगातार कई चुनौतियों के बावजूद आंचल ने साहस और निश्चय के साथ कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। उनका यह साहस न केवल उनके लिए एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम में एक प्रतीकात्मक सफलता भी है जो अक्सर विकलांग लोगों के लिए कष्ट से भरी होती है। इसलिए यह कहना सही रहेगा कि आंचल का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

लिंक्डइन पर एक शानदार पोस्ट में अपने गर्व और भावनाओं को शेयर करते हुए आंचल ने लिखा, “मुझे यहां होने पर गर्व है। ऐसी जगह लेने पर मुझे खुद पर गर्व है,जो मेरे जैसे किसी व्यक्ति को ध्यान में रखकर कभी नहीं बनाई गई थी।” आंचल भठेजा की यात्रा ने कानूनी और विकलांगता अधिकार समुदायों में कई लोगों को प्रेरित किया है। सिर्फ यही नहीं, उनके साहस, क्षमता और दृढ़ विश्वास की तारीफ भी की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अदालत में उनकी उपस्थिति को एक ऐतिहासिक पल के रूप में सराहा है।

Anchal Bhatheja Story
Anchal Bhatheja Story

आंचल की कहानी हमें याद दिलाती है कि हमें अधिक समावेशी सिस्टम बनाने की जरूरत है ताकि हर तरह के क्षेत्र के लोग समाज में अपने सार्थक योगदान देने के काबिल बन सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले अपनी दृष्टि खोने के बावजूद आंचल ने हार नहीं मानी। CLAT पास करके उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया, बैंगलोर में एडमिशन लिया और वह ऐसा करने वाली पहली दृष्टिहीन छात्रा बन गईं।

सुप्रीम कोर्ट में अपनी पहली उपस्थिति में  आंचल ने उत्तराखंड न्यायिक सेवा (सिविल जज-जूनियर डिवीजन) की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले एक मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व किया। इस मामले की सुनवाई खास तौर पर 6 जून को रखी गई थी। आंचल भटेजा जैसे वकीलों का संघर्ष यह साबित करता है कि साहस, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी तरह की मुश्किल को पार किया जा सकता है। यह कहानी न केवल कानूनी पेशे में बल्कि पूरे समाज में समावेश और समान अवसर का उदाहरण है।

स्पर्धा रानी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज ने हिन्दी में एमए और वाईएमसीए से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। बीते 20 वर्षों से वे लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट लेखन में सक्रिय हैं। अपने करियर में कई प्रमुख सेलिब्रिटीज़ के इंटरव्यू...