Kanya Pujan ka Mahatv
Kanya Pujan ka Mahatv

Kanya Pujan Story: भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का रूप माना गया है। विशेषकर नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन की परंपरा अत्यंत पावन मानी जाती है। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नारी-सम्मान का प्रतीक भी है।

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है, और अंतिम दिन (अष्टमी या नवमी) को नव कन्याओं का पूजन करके यह माना जाता है कि सभी देवी-स्वरूपों की पूजा एक साथ संपन्न हो गई। प्रत्येक कन्या एक विशेष देवी स्वरूप का प्रतीक होती है — जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा आदि।

कन्या पूजन का धार्मिक आधार यह है कि शक्ति की उपासना तभी पूर्ण मानी जाती है जब उस शक्ति के सजीव रूप — कन्या — का सम्मान किया जाए। यह श्रद्धा का प्रतीक है कि हर बालिका में दिव्यता है, और उसे केवल लाड़-प्यार नहीं, सम्मान और अधिकार भी मिलना चाहिए।

लेकिन इसका सामाजिक अर्थ और भी गहरा है। कन्या पूजन की परंपरा समाज को यह याद दिलाती है कि कन्या केवल पूज्य नहीं, संरक्षण और समानता की अधिकारी भी है। वह शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की हकदार है।

आज जब बालिकाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं, तो यह परंपरा हमें फिर से चेताती है कि कन्याओं का सम्मान केवल एक दिन की पूजा तक सीमित न हो —
बल्कि वह एक जीवन मूल्य बने।

कन्या पूजन का मूल संदेश यह है —
“जो कन्या को पूजता है, वही शक्ति की सच्ची आराधना करता है।”