Hindi Love Story: “काश! आज की रात घर जाने की ज़रूरत ही ना होती।” उस शाम उसने अपना चेहरा इस तरह कार की खिड़की से बाहर निकाला हुआ था, जैसे तेज़ बारिश के बाद गीले मौसम का हरापन, ज़िंदगी भर के लिए अपने अंदर भर लेना हो।
हमने दो-दो पेग पीए थे और मौसम का मज़ा लेते शहर से पन्द्रह-बीस किलोमीटर दूर निकल आए थे। वह बाहर की तरफ़ ज़्यादा देख रही थी और मैं उसके उड़ते बालों और सड़क के बीच नज़रों का तालमेल बिठाए जा रहा था। मिट्टी की महक, सुरूर और रह-रह कर हमारी चुम्मियाँ वह समा बना रही थी कि, संगदिल यमदूत की नज़रें भी हम पर होती, तो दो-चार घंटे मुँह फेर ही लेता।
एक ढाबे से हमने पनीर चिल्ली और चिकन टिक्के का पार्सल लेकर वापसी की तरफ़ कार ले ली। उसने बहुत ही सलीक़े से एक प्लेट में थोड़ी पनीर चिल्ली और थोड़ा चिकन टिक्का निकाल कर हर टुकड़े को सलाद और तीखी हरी चटनी से लपेट दिया।
शहर थोड़ी ही दूर रह गया था, पता चला हम जाम में फँस गए हैं। बारिश से कोई पेड़ सड़क पर आ गिरा था और दूसरी तरफ़ कोई ट्रक होशियारी दिखाने के चक्कर में फँस गया था। हालात का जायज़ा लेकर मैंने उसे बताया।
“माई गॉड। भगवान ने सुन तो नहीं ली मेरी। घर से निकाल देंगे, बॉस।”
“हा…हा…हा…सुपर्ब। और माँगों ऐसी दुआएँ भगवान से, जिनके सच हो जाने पर भी जान निकलती हो। अब यहीं रात बिताते हैं हम।” मुझे पता था, थोड़ी देर में जाम खुल जाएगा।
“रात नहीं…ज़िंदगी ही बितानी पड़ेगी अब तो…घर नहीं पहुँची रात तक तो, भयानक कांड हो जाएगा।”
“देखो डार्लिंग,बुज़ुर्ग कह गए हैं -‘चिंता, चिता समान’ एक-एक पेग बनाओ और पार्सल ख़त्म करो।”
“पागल हो गए हो तुम। पूरा नशा तो उतार दिया। कुछ जुगाड़ देखो, घर कैसे जा सकते हैं।” एक तो वो चेहरा आफ़त, उस पर भी आफ़त।
मेरे ज़ायके का बैरी परमेश्वर। आगे गाड़ियाँ सरकने लगी और वह लगभग चिल्लाई ही- “अरे, खुल गया जाम…”
“खुल जाता यार, रोका किस काफ़िर ने था। पर इतनी जल्दी क्या थी?”
“दुष्ट, मरवाने की फ़िराक़ में थे तुम तो आज।” उसने एक चिकोटी मेरी जांघो पर काटी और आख़िरी पेग बनाकर डैश बोर्ड के बॉटल होल्डर में लगाये।
अगला घूँट भरते हुए संजीदगी छायी- “काश हम दोनों पूरी ज़िंदगी साथ रह पाते। मुझे कहीं जाने की ज़रूरत ही नहीं होती।”
“साथ ही रहेंगे जानेमन, अगर हमने एक दूसरे को बाँध नहीं लिया। मेरे आज़ादी के बंधन से छूट कर तुम जा भी कहाँ सकोगी?” मैंने उसके शांत चेहरे की ओर निगाह भर देखा पर मुझे उसके माथे पर अनागत अशांति के चिन्ह लकीरों की जगह रस्सी से लगे।
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
