Hindi Funny Story: बेटे की मासूमियत या मेरी फजीहत? घर में ननद आई हुई थी, सोचा मंदिर दर्शन का ह्रश्वलान बना लिया जाए। सब खुशी- खुशी कार में बैठे, लेकिन जैसे ही सफर शुरू हुआ, बेटे की किसी बात पर तुनकमिजाजी चालू हो गई। अब जनाब ने फैसला कर लिया कि मम्मी की हर बात काटनी है! मैं मुंह टेढ़ा कर रही थी, इशारों में समझा रही थी, लेकिन साहब ने ठान लिया था कि मम्मी की परीक्षा लेनी है।
इतने में मेरा चेहरा देखकर वह सब समझ गया, ‘बस, अब बुरा फंस गया! और फिर ड्रामा क्वीन की तरह घोषणा कर दी, ‘अब मम्मी घर में रूम में ले जाकर डाटेंगी और मारेगी!
मेरी ननद ने चौंककर पूछा, ‘क्यों?’ अब जो बेटे ने अगली बात कही, वो सुनकर कार में अचानक सीट बेल्ट से भी ज्यादा टाइट सन्नाटा छा गया, ‘अरे! मम्मी तो ऐसा ही करती हैं, किसी के सामने कुछ बोल दो तो बाद में रूम में ले जाकर डांटती हैं और चांटा भी मार देती हैं कि ऐसा क्यों बोला था! इतना सुनते ही सबने अपनी-अपनी खिड़की के बाहर देखने में भलाई समझी। मैं भी झेंप गई और इसमें सफाई दूं भी तो क्या? मैंने सिर्फ इतना कहा, ‘अरे, इसे समझाना पड़ता है ना! लेकिन मन ही मन चाह रही थी कि कार की सीट में ही समा जाऊं!
