Bachpan ke Chupe Aasun
Bachpan ke Chupe Aasun

Hindi Short Stories: मां का रंग गोरा और पिता का रंग सांवला…अब ये निखर के हाथ में कहां था कि वह अपनी मां पर जाए। मतलब सांवला रंग पिता पर क्या चला गया, उसका तो बचपन ही उससे छिन लिया गया। उसमें भी छोटा भाई हुआ तो उसकी किस्मत तो देखो, गोरे रंग के साथ पैदा हुआ, बिलकुल मां जैसा। अब तो इस ‘रंग भेद’ ने इतनी कुंठा भर दी कि उससे निकलने के बाद में 6-7 साल की बच्ची क्या ही जानेगी।

निखर के आंसू रूकते ही नहीं है जब उसे अपना बचपन याद आता है। जब योगेश ने शादी के लिए प्रस्ताव दिया और कहा, “निखर! तुम बेहद खूबसूरत हो! तुम्हारी भोली सूरत पर मेरा दिल आ गया था। क्या तुम मुझसे शादी करोगी?”  बस निखर के आंखों से आंसू निकलने लगे और रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। योगेश घबरा गया कि उसने कहीं किसी गलत समय पर तो अपना प्रस्ताव नहीं रखा। उसने सांत्वना दी, समझाया कि वह बताए कि रो क्यों रही है। निखरी भी जैसे जज्बातों से भरी हुई थी। तुरंत बोल पड़ी, “योगेश! पता है तुम्हें? मुझे अपने बचपन में कितने दुख मिले हैं, सिर्फ अपने रंग की वजह से!” निखर के मुंह से रूक-रूक कर शब्द निकल रहे थे। योगेश ने प्यार भरी नज़रों से देखकर कहा, “जो मन में हो तुम्हारे सब मेरे सामने रख दो निखर, ऐसे अकेले मत तड़पो।”

निखर ने पर्स से रूमाल निकाला। आंसू पोंछें। पर्स से छोटी सी पानी की बोतल निकाल कर गला गीला किया। दोनों हाथों को मुंह पर रखकर एक गहरी सांस ली। फिर योगेश की आंखों में आंखें डालकर पूछा, “तुम्हें मेरे रंग से कोई समस्या नहीं है? क्या तुम्हें अपने परिवार-रिश्तेदारों से ताने नहीं मिलेंगे – ये कहां से काली-कलुटी से शादी कर ली?” योगेश कुछ कहने ही वाला था कि निखर ने उसके होंठों पर हाथ रखकर चुप करा दिया।

वह बोली, “योगेश! कितनी मासूम थी मैं..छोटी सी बच्ची, जब उसे ये सुनने को मिला कि छोरी का तो रंग ही साफ नहीं है, बेटी के शादी-ब्याह में बहुत दिक्कतें आएगी मिश्राजी को। मुझे तो इन बातों का तब मतलब नहीं पता था। लेकिन एहसास हो गया था कि मेरी सूरत-शक्ल में कमी है। ऐसी कमी जो हर किसी को खलती है और हर किसी की आंखों में चुभती है।”

गहरी सांस भरते हुए निखर ने बोला, “पता है योगेश, मां मुझे शादी में ले जाती ना, तो कोई भी बिना सोचे समझे मेरे रंग पर टिप्पणी कर देता था। कोई कहता कि अरे इसे हल्के रंग के कपड़े पहनाया करो। गहरे रंग के कपड़े में ज्यादा काली लगती है। योगेश! ये लोग मेरे सामने ही ऐसी बात कह देते थे। मुझे बहुत बुरा लगता था।”

इतना कहकर निखर फिर से रोने लगी। रोते हुए ही कहने लगी, “कही बाहर जाते, रिश्तेदारों के यहां जाते, तो सब भाई को गोदी में उठाकर प्यार करते। मुझे देखकर मुंह बना लेते थे। गोदी में लेना तो दूर सिर पर प्यार से तक हाथ नहीं फेरते और कम पड़ता तो दो-चार बात मेरे रंग के बारे में कहकर मुझे रूला देते।”

“योगेश मैं किसी के सामने नहीं रोती थी। बाथरूम में जाती और वहां कोने में बैठकर खूब रोती। अरे! मेरा हाल ऐसा हो गया था कि शादी में जाना तो पहली बात पसंद नहीं था लेकिन जाती तो जानबुझकर घंटों बाथरूम में बैठ जाती, ताकि कम से कम लोगों से सामना हो।” योगेश का हाथ पकड़ते हुए निखर ने ये बात कही।

अपनी आंखें बंद करके आगे बोली, “योगेश मुझे नहीं पता तुम्हें मुझमें ऐसा क्या दिखा लेकिन सच कहूं पहली बार मुझे इस दुख के साथ मैं बहुत अच्छा सा एहसास भी हो रहा है और लग रहा है कि दुनिया शायद इतनी बुरी नहीं है जितना कि मैं महसूस करते आई हूं। तुमने मेरे रंग को तवज्जों न देकर जो दिल की कद्र की उसके लिए मैं तुम्हें क्या कहूं। बस तुम ये मानो तुमने मेरी जिंदगी में रंग भर दिया है।“

निखर की बात सुनकर योगेश उसे गले से लगा लेता है और बस इतना कहता है, “निखर, तुम वाकई ‘निखर’ रही हो!”

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...