Parenting Advice
Camera In Teenager's Room Credit: Istock

Parenting Advice: प्राइवेसी हर किसी के लिए आवश्‍यक होती है, ये हमेशा से दुनिया का सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। खासकर टीनेजर्स अपनी प्राइवेसी को लेकर अधिक सचेत और सजग रहते हैं। लेकिन अधिकांश पेरेंट्स बच्‍चे के बेहतर भविष्‍य और निगरानी रखने के लिए उनकी प्राइवेसी में हस्‍तक्षेप करने लगते हैं। जहां एक ओर माना जाता है कि बच्‍चों की प्राइवेट लाइफ में एक उम्र के बाद हस्‍तक्षेप करना रिश्‍ते को कमजोर बना सकता है। वहीं दूसरी ओर बच्‍चे की हरकतों और कार्यों पर लगाम लगाने के लिए पेरेंट्स का सवाल-जबाव करना सही माना जाता है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसे ही एक मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। चलिए जानते हैं इसके बारे में।

क्‍या है मामला

Parenting Advice
what is the matter

सोशल मीडिया पर एक फोटो को लेकर पेरेंट्स और टीनेजर्स के बीच चर्चा की जा रही है। ये फोटो एक 16 वर्षीय लड़की का है जो आईआईटी जेईई एग्‍जाम की तैयारी कर रही है। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करते हुए लड़की ने बताया कि उसके पेरेंट्स से उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसके कमरे में कैमरा लगवाया है। लड़की को जब इस बात की भनक पड़ी तो वह दूसरे कमरे में सिफ्ट हो गई लेकिन पेरेंट्स ने दूसरे कमरे में भी कैमरा लगवा दिया ताकि वह उस पर नजर रख सकें। बच्‍चे की प्राइवेसी को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ। जहां पेरेंट्स बच्‍चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं वहीं टीनेजर्स पेरेंट्स की जरूरत से ज्‍यादा दखलंदाजी को कैद का नाम दे रहे हैं।

पेरेंट्स की हस्‍ताक्षेप का प्रभाव

बच्‍चे हो सकते हैं बागी

माना जाता है कि टीनेज में बच्‍चों से दोस्‍तों जैसा व्‍यवहार करना चाहिए ताकि बच्‍चे पेरेंट्स से हर बात शेयर कर सकें। लेकिन यदि पेरेंट्स बच्‍चों पर जरूरत से ज्‍यादा पाबंदी और नजर बनाए रखेंगे तो बच्‍चे बागी बन सकते हैं।

पेरेंट्स को समझते हैं दुश्‍मन

टीनेज में बच्‍चों का शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा होता है। ऐसे में उन्‍हें पेरेंट्स द्वारा टोकना या समझाना सही नहीं लगता। जब पेरेंट्स बच्‍चों पर जरूरत से ज्‍यादा लगाम लगाने लगते हैं तो बच्‍चे पेरेंट्स को दुश्‍मन मान बैठते हैं।

मानसिक दबाव

बच्‍चे मन के बेहद कोमल और नाजुक होते हैं। खासकर टीनेज में हार्मोनल परिवर्तन के कारण बच्‍चे अधिक संवेदनशील और भावुक हो जाते हैं। ऐसे में पेरेंट्स द्वारा की गई सख्‍ती बच्‍चे पर मानसिक दबाव बना सकती है। जो तनाव और एंग्‍जाइटी का कारण बन जाती है।

विश्‍वास की कमी

बच्‍चे सबसे ज्‍यादा अपने पेरेंट्स के करीब होते हैं। वह चाहते हैं कि पेरेंट्स उनके साथ दोस्‍तों जैसा व्‍यवहार करें। लेकिन जब पेरेंट्स सख्‍ती बरतने लगते हैं तो वह बच्‍चों का विश्‍वास खो देते हैं।

पेरेंट्स का नजरीया

बच्‍चों में कमरे में नहीं होना चाहिए कैमरा
Parents’ perspective

बच्‍चे की सुरक्षा

हर पेरेंट्स अपने बच्‍चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है। सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए वह कोई भी फैसला ले सकता है।

बिगड़ने का डर

टीनेज में अधिकांश बच्‍चे रास्‍ता भटक जाते हैं और गलत संगती में पड़ जाते हैं। बिगड़ने के डर से पेरेंट्स बच्‍चों की लाइफ में दखल देने लगते हैं।

दुर्घटना का डर

इस उम्र में बच्‍चे दुर्घटना का शिकार आसानी से हो सकते हैं जिसके डर से पेरेंट्स बच्‍चे पर नजर बनाए रखते हैं।

बच्‍चे के कमरे में कैमरा लगाना सही या गलत

बच्‍चे की जिंदगी पर पेरेंट्स का पूरा हक होता है। लेकिन इसका मतलब से नहीं कि पेरेंट्स बच्‍चे की प्राइवेसी में दखलांदाजी करें। बच्‍चे के कमरे में कैमरा लगाना पूरी तरह से गलत है। यदि पेरेंट्स बच्‍चे के साथ दोस्‍ताना व्‍यवहार अपनाएंगे तो बच्‍चा आसानी से अपनी बात शेयर कर पाएगा। इससे दोनों के बीच न केवल बेहतर और मजबूत रिश्‍ता बनेगा बल्कि विश्‍वास भी बढ़ेगा।