
खैर दिन बीत गया, और रेखा के कॉलेज की छुट्टी हो गई। तो मधु ने भी उतने समय सोचा की बिटिया वापस आ रही होगी तो क्यों ना इस गर्मी में उसके लिए मैंगो शेक बनाया जाए। पर उसने फ्रिज में जाकर देखा की आम तो थे ही नहीं। फिर उसने सोचा कि रेखा को फोन करके वापस आते समय आम लाने को कह देती हूं। लेकिन ये क्या, मधु जितनी बार भी फोन कर उतने बार उसे यह सुनने को मिले ‘ जिसे आप कॉल कर रहे हैं वह अभी दूसरी कॉल पर व्यसत है। करीब-करीब 15 बार मधु ने यही सुना।

खैर रेखा घर आ गई और आते ही मधु ने कहा कि सोचा था तेरे लिए मैंगो शेक बनाउंगी। रेखा मैंगो शेक का नाम सुनते ही खुशी से उछल पड़ी। फिर मधु ने कहा पर आम नहीं है। तो रेखा ने चिल्लाते हुए कहा कि मुझसे मंगा नहीं पा रही थी? मधु ने कहा मैनें तुम्हें बहुत बार कॉल किया लेकिन बिजी आ रहा था। तो रेखा ने बात काटते हुए बोला कि तो मैसेज ही कर देते, लेकिन आप तो गवार हो, मैसेज कहां कर पाओगे। इतना कहकर वह अपने कमरे में चली गई। और मधु अपने आंसू पीकर रह गई।

अगले दिन जब रेखा कॉलेज गई तो उसने देखा कि कॉलेज में उसकी सहेलियां आपस में यह बात कर रही थी कि तू मां को क्या दे रही है, मैं तो पर्स गिफ्ट कर रही हूं। ये सुनकर भी रेखा ने इस बात को अनसुना किया और क्लास में चली गई। उसकी सीट पर उसकी फ्रेंड स्नेहा उदास सी शक्ल लिए बैठी हुई थी। रेखा ने पूछा ‘ तेरा मुंह क्यों लटका हुआ है।

स्नेहा ने नम आंखों से कहा ‘कल मदर्स डे है और मेरी तो मां तो मुझे 4 साल पहले ही छोड़कर जा चुकी है, मैं किसके लिए गिफ्ट लूं, किसे स्पेशल फील करवांउ। इतना कहकर स्नेहा ने रेखा से सवाल किया, ये बता तू क्या कर रही अपनी मां के लिए। रेखा ने कहा मुझे तो पता ही नहीं था कि कल मदर्स डे है, देखती हूं दे दूंगी कुछ। स्नेहा ने हंसते हुए अपनी नम आंखो से कहा- किस्मत वाले होतो हैं वो जिनकी मां होती है, कुछ बढ़िया करना। कॉलेज के बाद रेखा ने चॉकलेट ली और सोचा कि 12 बजे रात को मां को चॉकलेट के साथ विश करेगी। 12 बज गए, रेखा अपनी मां के कमरे में गई और उसे उठाने के लिए हाथ से हिलाया तब रेखा को पटा चला कि मां को तो तेज बुखार चढ़ा हुआ है।

खैर जैसे- तैसे मधु उठी और मुस्करा कर पूछा क्या हुआ? कुछ चाहिए?रेखा ने शर्मिंदगी भरी आंखों से कहा नहीं कुछ चाहिए नहीं, बस मदर्स डे विश करने आई थी। हैप्पी मदर्स डे मां! यह सुनकर मधु ने आंसू भरी आंखों से कहा, बेटा मां के नाम सिर्फ एक ही दिन क्यों? मां के लिए प्यार- इज्जत सिर्फ एक ही दिन क्यों। मेरी खुशी तो बस तुम में हैं। तुम रोज अगर ऐसे ही प्यार के दो शब्द मुझसे बोल दोगी, और मेरी एक भी बात मान लोगी तो मेरे लिए सबसे बड़ा गिफ्ट वही होगा। तुम्हारा फोन के चक्कर में मुझे इग्नोर करना, मेरे प्यार को अनदेखा करना, बहुत चुभता है मुझे। बेटा एक दिन मैं चली जाउंगी, फिर तुम्हें देखना मेरी याद जरूर आएगी।

मधु के इतना कहते ही रेखा ने मां को गले लगा लिया, उसे अपनी सहेली स्नेहा की कही हुई बात याद आ गई (- किस्मत वाले होते हैं वो जिनकी मां होती है) और कहा मां जाने की बात ना करो, मुझे मांफ कर दो। आप सही कह रहे हो, सिर्फ एक दिन मां के नाम करने का कोई मतलब नहीं है। मैं अपनी गलतियों को सुधारुंगी। फिर दोनों हंसते- हंसते गले लग गए। दोनों ने चॉकलेट खाई। रेखा नें मां को आकर दवाई दी। अब रेखा मां के पूरा समय देती है और अब वो इस बात पर यकीन रखती है कि – मां के साथ बिताया, खास होता है हर पल, इसलिए उसे रोज करवाओ फील स्पेशल..
