रविवार का दिन था तो सब देर से सो कर उठे थे। मां सबके लिए कुछ खास बना रही थी। और पापा ड्रॉइंग रूम में बैठ कर अखबार पढ़ कर सबको आज की खास खबर सुना रहे थे। गोलू वहीं बैठ कर तेज आवाज में कॉर्टून देख रहा था। इतने में मीरा बाहर आकर टीवी का चैनल चेंज कर देती है और गोलू रोने लगता है।
गोलू और मीरा लड़ने लगते हैं। मां रसोई से बाहर आर चिल्लाती है और बोलती है कि दोनों को एक ही टाइम पर टीवी देखना होता है, इससे अच्छा इस टीवी को ही बेच दो। ना रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। मम्मी गुस्से में फिर से रसोई में चली जाती है और पापा उन्हें मनाने रसोई में मम्मी की मदद करने के लिए जाते हैं, पर मम्मी नहीं मानती।
अब दिन हो गया था और गर्मी भी बहुत बढ़ गई थी। सामने की दीवार पर लगी घड़ी पर मीरा का ध्यान गया। उसने देखा वहां एक छिपकली थी। मीरा चिल्लाई, मम्मी पापा जल्दी आओ दीवार पर छिपकली मेरे ऊपर गिर जायेगी। पापा मम्मी बोलने लगे इतनी छोटी से छिपकली से कोई डरता है भला। गोलू मीरा पर हंसने लगा और पलंग के गद्दे पर कूदकर बोलने लगा मीरा डरपोक, मीरा डरपोक। मम्मी बोलने लगी खाना तैयार है सब आकर खाना खा लो सारा दिन शोर शराबा करते रहते हैं। एक बज गया था। भूख भी लगी थी तो सब डाइनिंग टेबल पर आ गये खाना खाने। सबको बहुत भूख लगी थी और खाने की खुशबू से भूख और ज्यादा बढ़ गई थी गोलू और मीरा से तो सब्र ही नहीं हो रहा था। आज खाने में खास जो बना था पर क्या बना था ये न गोलू को पता था न मीरा को गोलू ने उत्सुकता दिखाते हुए कटोरे को खोला तो कहा वॉव आज सांबर बड़ा बना है। बस इतना ही बोला की लाईट चली गयी पापा ने काह लो जी अब इतनी गर्मी में खाना कैसे खाया जाएगा। मम्मी ने कोई बात नहीं आज हम बिल्कुल वैसे खाएंगे जैसे बचपन में खाया करते थे। गोलू और मीरा उत्साहित होकर पूछने लगे कैसे मम्मी। मम्मी ने कहा मीरा जा अन्दर स्टोर रूम में चटाई रखी है ले आ और गोलू तू जरा मेरे साथ आ जरा ये ऊपर चढ़ के स्टील की थाली और कटोरी तो निकाल गोलू ने कहा पर मम्मी हम तो कांच के बर्तन में खाना खाते हैं फिर ये स्टील के बर्तन क्यों निकलवा रही हो मम्मी ने कहा तू बस निकाल और आंगन में आ बर्तन लेकर मम्मी सोचने लगी मीरा अब तक नहीं आई चटाई लेने गई है या चटाई बनाने गई है। मम्मी ने आवाज लगाते हुए बोला, मीरा को मीरा बोली आई मम्मी मिल गई चटाई बहुत अंधेरा था इसलिए चटाई ढूंढ़ने में टाइम लग गया पापा बोलने अरे तो मीरा तू मोमबत्ती ले जाती साथ अब सब आंगन में आ गये थे। मीरा और गोलू अब भी समझ नहीं पाये थे कि मम्मी ने ये चटाई क्यों मंगवाई थी बर्तन क्यों निकलवाये स्टील के। दोनों ने मम्मी से पूछते हुई कहा कि अब तो बताओ क्यों मंगवाया ये सब और आंगन में क्यों आए हम सब पापा मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे क्योंकि पापा जानते थे मम्मी क्या करना चाहती है पापा जानते थे कि मम्मी अपने बचपन कि याद ताता कर रही थी। इतने में मम्मी ने कहा अब सब खड़े ही रहोगे आंगन में । चटाई बिछाओ पेड़ के पास जिससे हमें पेड़ की ठंडी हवा भी मिलती रहेगी पेड़ हमारी दादी ने लगाया था बहुत साल पहले जो आज भी हमारे आंगन में लगा था क्योंकि पापा बोलते थे कि ये पेड़ हमारी दादी ने खुद लगाया था और इसकी बहुत सेवा भी कि थी और दादी हमेशा बोला करती थी कि इस पेड़ को कभी मत कटवाना मेेरे मरने के बाद भी। अब चटाई भी बिछा दी और मम्मी ने कहा अब आज हम इस पेड़ के नीचे ही खाना खाएंगे और मम्मी और मीरा ने खाना परोसना शुरू किया और सबसे पहले गोलू को थाली मिलते ही वो तो सांबर बड़े पर टूट ही पड़ा गोलू को सांबर बड़ा बहुत पसंद था। अब सब बहुत ही आनन्द से सांबर बड़ा खा रहे थे। इतने में दरवाजे पर घंटी बजी मीरा उठकर जाने लगी तो पापा ने कहा मीरा तू खाना खा मैं देखता हूं। हम पीछे आंगन में बैठे थे तो दरवाजे तक जाने में टाइम लगता है। इसलिए इस बीच एक बार फिर घंटी बजी पापा दरवाजे के पास पहुंच ही गये थे। इसलिए पापा गुस्से में बोले अरे सब्र करो आने में टाइम लगता है। खोल रहा हूं। दरवाजा, और दरवाजा खोला पापा ने देखा सामने मामा जी खड़े हैं। मुंबई वाले। मामा जी ने पापा के पैर छुए और कहा कैसे हैं जीजा जी आप मजाक में काफी कमजोर हो गये हैं। पापा ने भी मजाक में कहा तुम्हारी दीदी खून ज्यादा पी जाती है। आजकल मेरा हाहाहाहा। दोनो साथ में अन्दर हैं। लाईट नहीं आ रही तो मामा जी ने कहा इतना अंधेरा क्यों है पापा ने कहा हां लाइट गई हुए है एक तो इतनी गर्मी है ऊपर से ये लाईट कभी भी चली जाती है। मामाजी ने पापा से पूछा दीदी कहां हैं और बच्चे भी शोर करते नहीं नजर आ रहे बच्चों ने शैतानी करनी छोड़ दी है क्या पापा ने कहा बच्चे और दीदी सब पीछे आंगन में हैं तुम्हारी दीदी ने आज सांबर बड़ा बनाया है तो इसलिए आज आंगन में पेड़ के नीचे बैठ के खाने का मन था तो वहां बैठे हैं। इतने में बच्चों की नजर मामा जी पर पड़ी बच्चे मम्मी को देख कर बोलने लगे मम्मी देखो मामाजी आये हैं और दौड़ कर मामाजी के पास आ गये और बोलने लगे मामाजी हमारे लिए मुंबई से क्या लाये हैं। गोलू ने कहा मैंने आपसे वीडियो गेम मंगाई थी आप लाये हैं। ना मामाजी ने कहा हां हां मैं तुम दोनों के लिए गिफ्ट लाया हूं और तुम्हारी वीडियो गेम भी। मम्मी बोलने लगी मामाजी से मामाजी का नाम दिन्नू था और दिन्नू कैसा है बहुत दिन बाद आया घर में सब कैसे हैं। मां ने क्या क्या भेजा है मेरे लिए ले पानी पी और आज सांबर बड़ा बना है खाएगा तू। दिन्नू ने कहा हां-हां बिल्कुल दीदी बिल्कुल खाऊंगा मामाजी सांबर बड़ा खाते हुए बोलने लगे ये तो बिल्कुल बचपन की याद आ गई आज दीदी हम बचपन में भी ऐसे आंगन में चटाई बिछा कर पेड़ के नीचे स्टील के बर्तन में खाना खाया करते थे आज बहुत सालों बाद ऐसे खाना कर ऐसा लग रहा है। जैसे हम बचपन में वापिस चले गये डाइनिंग टेबल पंखे की हवा इन सब में तो नहीं है जो नीचे बैठकर पेड़ के नीचे बैठकर खाने में है। फ्रिज का पानी भी उतना मीठा नहीं लगता जब हम कुएं से पानी निकाल कर पीते थे। काश वो सब वापस लौट कर आ जाये। आज की टेक्नि्कल चीजों में आराम जरूर है पर खुशी और सेहत नहीं जो पहले हुआ करती थी। सब बाते करते करते थक गए तो सबको नींद आने लगी इसलिए पापा ने कहा सब थोड़ा आराम कर लो और लाइट भी आ गई है।
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