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‘संत और सिपाही’ गुरु गोबिंद सिंह

सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु गुरु गोबिंद सिंह की जयंती हर्षोल्लास के साथ पूरे भारत में मनाई जाती है। बिहार के पटना साहिब में जन्में गुरु गोबिंद सिंह की स्मृति में यहां एक भव्य गुरुद्वारा भी स्थापित है, जहां सभी धर्मों के लोग दर्शन के लिए आते हैं।

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अनवरत प्रेम का नाम है भक्ति

भक्ति मानव जीवन की वो आवश्यकता है जिसके द्वारा मानव अपूर्णता से पूर्णता की ओर निराशा से आशा की ओर बढ़ता है। भक्ति के अभाव में सब कुछ नीरस, स्वार्थ परक, भावना शून्य है। इसलिए वैदिक साहित्य में भक्ति को आवश्यक बताया है। जिस मानव के अंदर भक्ति नहीं है वो पत्थर के समान है निष्प्राण है उसका जीवन एक पशु के समान व्यतीत होता है वो जीवन के आनन्द से वंचित रह जाता है। भक्ति हीन जीवन नीरस ही नहीं वरन वासनामय होता है जिससे मात्र अशांति ही प्राप्त होती है और अन्त में दुर्गति होती है।

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