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दुखिया सब संसार

पुजारी जी भले ही अपनी कालोनी में सम्मानित वृद्ध थे, पर उनके घर में उनसे भी यही उम्मीद की जाती थी कि वे अपनी शक्ल ज्यादातर बाहर वालों को दिखाएं और धर्मशाला की भांति सिर्फ रात्रि-शयन के लिए घर पर आएं।

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