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सरस्वती वंदना-गृहलक्ष्मी की कविता

Saraswati Poem: हे मां वीणा वादिनी ऐसा तू वरदान दे,ज्ञान से झोली तू भर दे, ज्ञान का आकाश दे।ज्ञान की गंगा बहे मां, ज्ञान का भंडार दे,ज्ञान की चाशनी में मां तू, हमको भी बस पाक दे। ज्ञान की सरगम सजे मां, ज्ञान का संगीत हो,ज्ञान के नूपुर बजे मां,ज्ञान के ही साज हो।ज्ञान से […]

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