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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-37

संध्या की मौत को आज पंद्रह दिन बीत चुके थे। रायसाहब के कहने पर भी आनन्द ने उनके यहाँ रहना उचित न समझा और क्रिया-कर्म के पश्चात् वह संध्या के मकान में लौट आया। बेला भी बच्चे को लेकर वहीं चली आई। हर ओर शोक छाया हुआ था। जहाँ उसे बच्चे की खुशी के दिन […]

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