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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-16

रायसाहब के घर आज ब्याह की तैयारियाँ हो रही थीं। बारात आने में तीन घंटे बाकी थे। रायसाहब बाहर लॉन में शामियाने लगवा रहे थे। उन्हें संध्या की प्रतीक्षा थी-भीतर से हर आने वाले व्यक्ति से वह थोड़े समय पश्चात् उसके विषय में पूछ लेते-बार-बार उनकी दृष्टि बाहर फाटक पर जाती। क्या उसका मन इतना […]

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