Hindi Kahani:ज्योति को आज उसकी पहली सैलरी मिली थी.28 वर्षीय जयति ने काफी पापड़ बेले थे तब कहीं जाकर उसे ये सरकारी नौकरी मिली थी.अगर प्राइवेट सेक्टर से तुलना करी जाए तो 55 हजार कुछ भी मायने नहीं रखते , मगर सरकारी नौकरी में समय इतना अधिक नहीं देना पड़ता हैं और ना ही इतना तनाव रहता हैं.सबसे अच्छी बात ये हैं कि आपकी नौकरी सुरक्षित है और पीएफ और ग्रेच्युटी में भी प्राइवेट सेक्टर की तरह कोई घपला नहीं होता हैं. पहली सैलरी मिलते ही सबसे पहले जयति ने अपनी मम्मी के लिए एक साड़ी खरीदी , साड़ी की कीमत बस दो हजार थी मगर ये जयति के लिए इसलिए खास थी क्यूंकि पहली बार उसकी मम्मी के लिए कोई ऐसी साड़ी आई हैं जिसमें कोई डिफेक्ट नहीं है. मम्मी साड़ी लेते हुए बोली”अरे इसकी क्या जरूरत थी , इतनी सारी साड़ी हैं तो मेरे पास” जयति बोली”हां पता हैं कैसी साड़ी हैं तुम्हारे पास, अब इसे किसी के लिए रखना मत.चुपचाप पहन लेना” जयति की मम्मी सरल हुलसते हुए बोली”तेरी शादी में पहनूंगी” जयति के मुंह का जायका खराब हो गया. चिढ़ते हुए बोली”और भी हैं गम ज़माने में शादी के सिवा, परसो अपने जन्मदिन पर पहनना” जयति सांवली सलोनी प्यारी सी एक आम सी लड़की थी.बहुत बड़े बड़े नहीं, मगर छोटे छोटे सपने देखती थी और अपनी मेहनत के बल पर वो उन सपनो को भी पूरा करती थी.खूबसूरती में उसका कहीं नंबर नहीं लगता था मगर दिखने में वो आकर्षक थी. अपनी मम्मी, अपनी दीदी, अपनी सहेली या यूं कहे कि अपने आसपास की सारी विवाहित औरतों को जयति ने समझौते करते हुए ही देखा था.ऐसा नहीं जयति को शादी से या पुरुषो से नफरत दी मगर जयति को अपने सपनो की बागडोर किसी और के हाथ में देने की इच्छा नहीं थी. अगर कोई ऐसा साथी मिल जाए जो उसकी जिंदगी का मांझा अपने हाथ में लेने की कोशिश ना करे तो जयति तैयार थी,मगर चेहरे के ऊपर मुखौटे लगाकर चलने वाली दुनिया कहां ऐसे चलती हैं? कुछ को जयति के रंग से दिक्कत थी ,कुछ को जयति की उम्र से, कुछ लोगो को जयति की बेबाकी पसंद नहीं थी तो कुछ लोगो को उसका नौकरी करना भी नही भाता था.लड़के वाले चाहते थे वो नौकरी करे मगर उनकी पसंद से. अपने मम्मी के 50 जन्मदिन पर शाम को जयति ने एक छोटी सी पार्टी आयोजित करी थी.जयति की मम्मी अपने लिए ऐसा सरजाम देखकर दुल्हन की तरह शर्मा रही थी.जयति ने जब केक कटिंग ले लिए मम्मी को बुलाया तो मम्मी अपराधी की तरह बोली”अरे तेरे पापा नहीं हैं , क्या अच्छा लगेगा ऐसे केक काटना उनके बिना?” जयति झुंझलाते हुए बोली”ओफ्फो मम्मी, पापा अपने बर्थडे पर दोस्तो के साथ मनाते हैं और तुम्हे पहली बार बर्थडे मनाते हुए गिल्ट महसूस हो रहा हैं” पूरी पार्टी में जयति की मम्मी बेहद खुश थी, सच तो ये हैं कि ये शायद उनकी याद में पहला बर्थडे था जब वो एंजॉय कर रही थी. नही तो अपने बर्थडे पर भी जयति की मम्मी सरल पति और बच्चों की पसंद का ही बनाती रह जाती हैं.उपहार के सुनहले कवर को हटाते हुए सरल बच्चों की तरह खिलखिला रही थी.उपहार तो नॉर्मल ही थे मगर सरल के चेहरे पर जो खुशी थी वो अनमोल थी. जयति रात में अपनी मम्मी की गलबहियां डालते हुए बोली”खुश हो?” सरल बोली”बहुत, आज तक किसी ने भी मेरे बारे में इतना नहीं सोचा” जयति चिढ़ाते हुए बोली”आपके पति परमेश्वर ने भी नही?” “और आप मुझे बोलते रहते हो कि शादी के बाद ही किसी औरत की जिंदगी मुकम्मल होती हैं” सरल कुछ नही बोली मगर जयति की बात ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया था. जयति की पोस्टिंग बरेली हो गई थी.जयति के पापा उसे घर किराए पर दिलाने आए थे.बरेली अपने आप में एक छोटा सा शांत शहर था कुछ बातो में मॉर्डन था और कुछ बातो में अभी भी थोड़ा सा कंजरवेटिव.फ्लैट कल्चर था मगर अभी भी पूरी तरह से नहीं हुआ था. हर कोई जयति को घर तो देना चाहता था , उसका प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी होना उन्हें भाता था मगर उसकी अब तक शादी ना होना, उसका अकेले रहना सब कुछ लोगो को थोड़ा अटपटा लगता था.मगर थोड़े से प्रयास के बाद जयति को एक नई कॉलोनी में ऊपर एक छोटा सा पोर्शन मिल गया था.सबसे अच्छी बात ये थी कि ये घर जयति के दफ्तर से काफी करीब था.जयति का समान रखवाकर जयति के पापा विनोद जयति को ये सलाह देते हुए गए”अब शादी कर के सेटल हो जाओ” “बड़ी मुश्किल से ये घर मिल हैं.तुम्हार पोस्टिंग तो ऐसे ही छोटे शहरों में होगा, कब तक सबको बताओगी कि शादी क्यों नहीं करी अब तक?” पापा के जाने के बाद एक हफ्ते के भीतर ही जयति अपने नए घर और नई दिनचर्या में ढल गई थी. नीचे जयति के मकान मालिक रहते थे जिनके परिवार में सतीश, उनकी पत्नी कुसुम, बेटा प्रिंस और बहू आशी थे.उनकी बहु आशी जयति की हमउम्र थी इसलिए उनकी हाय हेलो हो जाती थी. शुरू के दो दिन तक जयति ने उनके घर पर ही डिनर किया था.सतीशजी खुले दिल के जिंदादिल इंसान थे, वो तो कह रहे थे कि जयति को रात के खाने के झंझट में नहीं पड़ना चाहिए.जयति को भी ये सुझाव पसंद आया था मगर उनकी पत्नी ने दूसरे दिन ही जयति के बारे में इतनी पूछताछ करी कि जयति ने कान ही पकड़ लिए. “शादी के लिए लड़का देखा ही नहीं या बात ही नहीं बनी” “कैसा लड़का चाहिए? कास्ट का चक्कर तो नहीं हैं, खाना बना सकती हो क्या, टूटा हुआ दिल तो नहीं हैं?” तब से जयति ने उस घर से दूरी बना ली थी.जब भी जयति दफ्तर के लिए निकलती या दफ्तर से आती , तो उनकी पैनी नज़रे जरूर जयति पर ही होती थी. तीन महीने बीत चुके थे.आज आशी की गोदभराई थी जयति दफ्तर से जल्दी आ गई थी और खूब सजधज कर नीचे चली गई थी. आशी बेहद खूबसूरत लग रही थी.तभी एक आशी की हमउम्र आई और जयति से बोली”आपके पति क्या करते हैं?” जयति मुस्कुराते हुए बोली”मेरी अभी शादी नहीं हुई हैं” वो कुछ कन्फ्यूजन में बोली”अरे आपको देखकर लगा शायद आपकी शादी हो गई हैं” जयति को समझ आ गया था उसकी साडी, गहने देखकर उसे लगा होगा.फिर कुसुम आंटी बोली”अरे कोई अच्छा लड़का हो तो बताना” “वैसे तो आजकल सभी लड़के इस उम्र तक शादी कर लेते है.किसी प्राइवेट फर्म में होती तो और बात थी , सरकारी दफ्तर में तो लड़के कहां मिलेगे?” एक और पड़ोस की आंटी थी जो जयति को आंखो ही आंखो में तोल रही थी. छूटते ही बोली”मेरा भतीजा हैं नोएडा में ,मगर इसका पोस्टिंग यहां हैं और इसके बराबर ही होगा या एकाध साल छोटा” कोई जयति को सलाह देते हुए बोल रहा था”जल्दी जल्दी शादी कर लो , वरना बाद में मां बनने में दिक्कत आ जाती हैं” जयति को समझ नही आया कि इस सदी में वो कैसे इस घर के लिए एक अजूबा बन गई थी.क्या 30 साल बहुत अधिक उम्र होती हैं? जितनी खुशी के साथ जयति इस उत्सव में आई थी, उतने ही कसैले मन के साथ वापिस चली गई.उससे वहां बैठ कर खाना भी नही खाया गया. घर आकर भी उसका मन विचिलत रहा, कहां गलती हो गई उससे? क्या अब वो कभी भी खुश नहीं रह पाएगी? विवाह एक समाज में उठने बैठने के लिए कितना जरूरी है खासतौर में मध्यमवर्गीय समाज में जयति को आज समझ आया था.मम्मी पापा की सारी बाते उसे अब समझ आ रही थी. अभी वो यूं ही अनमनी सी बैठी थी कि प्रिंस खाने का थाल लिए खड़ा था”आप बिना खाना खाए ही आ गई?” “ये छोटा शहर हैं और ऐसी ही छोटी सोच हैं यहां के लोगो की” “मैं तो आपको बहादुर समझता था ,आप तो पहले ही मैदान छोड़ कर भाग गई” जयति उदासी से बोली”आपको समझ नही आयेगा” फिर प्रिंस थोड़ी देर बैठा रहा और जयति को हंसाने का प्रयास करता रहा था. प्रिंस के जाने के बाद भी बहुत देर तक जयति प्रिंस की बातो में डूबी रही थी.प्रिंस का इस तरह उसके लिए खाना लाना, उससे बाते करना ,सब कुछ जयति को भा रहा था. फिर उस दिन के बाद से प्रिंस और जयति के बीच मैसेजेस का आदान प्रदान होने लगा.10 दिनों में ही ये मैसेजेस थोड़े इनफॉर्मल होने लगे थे. तभी एक दिन शाम को जयति के मकानमालिक का पूरा परिवार किसी विवाह में गया था दो दिनों के लिए.आशी नही जा सकती थी इसलिए जयति को आशी के साथ रहना था.आशी पूरा समय प्रिंस के प्यार और केरिंग नेचर की बात करती रही.आशी की बात सुनकर जयति आशी से बोली”क्या प्रिंस ने कभी भी चीट करने की कोशिश नहीं करी” आशी बोली”अरे चार साल डेट के बाद हमने शादी करी थी” “वो और लड़को जैसा नहीं हैं” जयति कुछ बोली नहीं मगर वो आशी की बातो से सहमत नहीं थी क्यूंकि प्रिंस के मैसेज जो वो जयति को भेजता था ,कुछ और ही बयां कर रहे थे. जब जयति ऑफिस पहुंची तो प्रिंस का कॉल आ रहा था.जयति ने उठाया तो पहले तो प्रिंस ने जयति से इधर उधर की बात करी , आशी के बारे में पूछा और फोन रखने से पहले प्रिंस ने कहा “तुम्हारे बिना सब कुछ अधूरा लगता हैं.तुम्हारे जैसी स्ट्रांग लड़की चाहिए थी मगर आशी जैसी छुई मुई मिल गई “ […]
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