आमतौर पर देखा गया है कि माता-पिता अपने किशोरावस्था की और बढ़ते बच्चे के बारे में बहुत ज्यादा चिंतित काफी चिंतित रहते हैं। बदलती जीवनशैली कहें , अनुचित खान – पान या फिर प्रतिस्पर्धा का माहौल बच्चे जाने अंजाने डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। कई बार ये डिप्रेशन इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि किशोर आत्महत्या जैसा बड़ा कदम तक उठा लेते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चों को डिप्रेशन की स्थिति से बचाने के लिए उनका हर काम में पूरा सहयोग दें।
