पति सोमेश के एक हफ्ते के टूर पर जाते ही पूनम ने भी अपना मन मायके में जाने का बना लिया, क्योंकि दोनों बच्चे भी समर कैैंम्प के लिये गये हुए थे। मन इतना खुश था कि रात को ही मां को फोन करके अपने आने की सूचना भी दे दी।
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अनमोल पलों के लिए – गृहलक्ष्मी कहानियां
मैं तुम्हें पाना चाहता हूं सम्पूर्ण रूप से। इस तरह पाना कि मुझे लगे मैंने तुम्हें पा लिया है। अब चाहे तुम इसे जो भी समझो। पुरूषों का पे्रम ऐसा ही होता है जिसे वे प्यार करते हैं उसके मन के साथ-साथ तन को भी पाना चाहते हैं। तुम इसे वासना समझती हो तो ये तुम्हारा समझना है।
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ठेस
मुझे जीना है अपनी पत्नी रेखा के लिए। भले ही उसने मुझे पति का दर्जा और मान-सम्मान न दिया हो, पर मैं उसे पत्नी मानता हूं। मेरे सिवा उसका है भी कौन? मुझे अपना इलाज कराना ही होगा। मुझे ठीक होना है अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए रेखा के लिए…
