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अधूरा-अधूरा सा है महिला सशक्तीकरण!

यूं तो भारतीय धार्मिक ग्रंथ से लेकर मुगल काल, अंग्रेजी सत्ता और अब आधुनिक भारत में अनेकों सशक्त महिलाओं के प्रतीक इतिहास में दर्ज़ हैं, लेकिन वास्तविकता में ज़मीन की कलई खुलती है तो यह सब प्रतीकात्मक ज़्यादा नज़र आता है।

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