कभी मांगकर, कभी बिना मांगे ही वह दे देती हैं हमारी जरूरतों को इतनी शिद्दत से शायद ही कोई और समझ सकता है। संभवत: इसलिए हमने इनकी आराधना के लिए मातृरूप ही चुना है। अपनी असली जिंदगी में भी हमने स्त्री को कभी शक्ति, कभी लक्ष्मी तो कभी सरस्वती कहकर पुकारा है।
