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ध्यान और कर्म का संतुलन – परमहंस योगानंद

आपका अच्छा स्वास्थ्य हो और आप इसे बिल्कुल भी सराहते न हों। परन्तु यदि आप अस्वस्थ हो जाएं तो, हो सकता आप उसका महत्त्व समझेंगे ईश्वर ने जो आपको प्रदान किया है उसके लिए उनका आभार प्रकट करें, विपरीत परिस्थितियों की प्रतीक्षा किए बिना कि वे आपको कृतज्ञ बनाएं।

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मनोदशाएं संक्रामक है – परमहंस योगानंद

मनोदशाओं पर विजय पाने के लिए निरन्तर प्रयास करते रहें, क्योंकि जैसे ही आप मनोदशा से ग्रस्त हो जाते हैं, आप अपनी आत्मा रूपी मिट्टïी में गलतियों के बीजों को बोते हैं। मनोदशाओं से घिरने का अर्थ है धीरे-धीरे मृत्यु की ओर बढ़ना, परन्तु यदि आप किसी भी अशान्त करने वाली घटना के होते हुए भी प्रतिदिन मुस्कराने का प्रयत्न करते हैं, तो आप एक नया जन्म पाएंगे।

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