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ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर में लोग पार्टनर से हद से ज्यादा प्यार करते हैं। वे रोमांटिक तो होते हैं, लेकिन पार्टनर की हर गतिविधि पर नजर रखना चाहते हैं।
Obsessive Love Disorder: प्यार, एक बहुत ही प्यारा एहसास है। यह आपको अंदर से खुशी देता है। अपने पार्टनर के साथ बिताया गया हर पल आपको खास लगता है। लेकिन जब यही प्यार जुनून में बदल जाता है तो इसके कई खतरनाक परिणाम सामने आते हैं। मनोचिकित्सक की भाषा में इसे ‘ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर’ कहा जाता है। क्या है यह डिसऑर्डर, आइए जानते हैं।
प्यार का जुनून है यह डिसऑर्डर

ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर में कोई व्यक्ति सामने वाले इंसान से इतना ज्यादा प्यार करने लगता है कि उसकी हर बात को वह कंट्रोल करना चाहता है। यह प्यार सामान्य प्रेम की हदें पार कर जाता है। ऐसे में सामने वाला शख्स असहज महसूस करने लगता है। अपने साथी का अजीब रवैया उसे परेशान करने लगता है। ऐसे रिश्ते में प्यार की जगह, नियंत्रण हावी होने लगता है।
ऐसे पहचानें इस डिसऑर्डर को
ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर में लोग पार्टनर से हद से ज्यादा प्यार करते हैं। वे रोमांटिक तो होते हैं, लेकिन पार्टनर की हर गतिविधि पर नजर रखना चाहते हैं। पार्टनर किससे बात कर रहा है, कैसे बात कर रहा है, कहां जा रहा है, कितनी देर के लिए जा रहा, मोबाइल का कितना उपयोग कर रहा है। ऐसी हर बात उसकी नजर में होती है। ऐसा शख्स हमेशा पार्टनर के करीब रहने की कोशिश करता है। जरूरत न होने पर भी उसे सुरक्षा देने का प्रयास करता है।
ये लक्षण भी आते हैं नजर
जब कोई शख्स ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर से पीड़ित होता है तो वह अपने पार्टनर के लिए खुद एक सीमा तय कर देता है। कपड़े पहनने से लेकर आर्थिक फैसले लेने तक। वह सब में दखल करता है। उसे ये तक पसंद नहीं आता कि उसके पार्टनर से कोई बात करे। हालांकि इसका प्रभाव और प्रतिक्रिया अलग अलग मामलों में अलग अलग हो सकती है।
सेक्स लाइफ पर गहरा असर
ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर लव लाइफ के साथ ही सेक्स लाइफ को भी प्रभावित करती है। इसके कारण सेक्स ड्राइव में कमी आती है। सेक्स के दौरान शख्स अपने पार्टनर की इच्छाओं और संतुष्टि को नजरअंदाज कर देता है। अंतरंगता के दौरान भी विकार से पीड़ित शख्स पार्टनर पर शक करता है। वह उसके व्यवहार का विश्लेषण करता रहता है। खासतौर पर बेवफाई के संकेत तलाशता है।
इसलिए विकसित होता है यह विकार
वैसे तो ओएलडी का कोई एक कारण नहीं है। यह कई कारणों से हो सकता है। कई बार इंसान बहुत ज्यादा भावुक होता है और यही इस डिसऑर्डर का कारण बन जाता है। बचपन में पेरेंट्स या अन्य के साथ नकारात्मक अनुभव भी इसका कारण हो सकते हैं। कई बार इंसान बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित होता है। जिसके कारण सामने वाले से अपनी इमेज जोड़ लेता है। वह कभी बहुत खुश हो जाता है तो कभी बेहद गुस्सा हो जाता है।
संभव है इसका उपचार
राहत की बात यह है कि ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर का इलाज संभव है। हालांकि यह डिसऑर्डर के प्रभाव पर भी निर्भर करता है। अगर ओएलडी के कारण भूख में कमी, थकान, सिरदर्द, अनिद्रा, मुंह सूखना, कामेच्छा में कमी, वजन बढ़ना, मतली आदि लक्षण नजर आते हैं, तो आप थेरेपी से इलाज ले सकते हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक काउंसलिंग भी काम कर जाती है। खासतौर पर अगर यह डिसऑर्डर बचपन के दौरान उपजा हो।
कुछ थेरेपी बनेंगी मददगार
इस परेशानी को दूर करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर आप कुछ थेरेपी ले सकते हैं। जिसमें कॉग्नीटिव बिहेवियरल थेरेपी, डायलेक्टिकल बिहेवियरल थेरेपी, प्ले थेरेपी और टॉक थेरेपी सबसे ज्यादा कारगर है। प्ले थेरेपी खासतौर पर बच्चों के लिए होती है, जिसमें बच्चों के साथ समय बिताकर अपनी परेशानी को दूर की जा सकती है।
