Child holding two paper bags with drawn faces one smiling and one sad covering their face.
Child holding two paper bags with drawn faces one smiling and one sad covering their face.

Summary: माता पिता के प्यार भरे शब्दों से होगा बच्चों के मन की हीन भावना का सफाया

बच्चों में हीन भावना उनके मानसिक विकास और आत्मविश्वास पर बुरा असर डालती है। माता-पिता और शिक्षक के सकारात्मक व्यवहार से बच्चे की हीन भावनाओं को कम किया जा सकता है।

Inferiority Complex in Children: बच्चे का मानसिक विकास पूरी तरह से उसकी सामाजिक, पारिवारिक और स्कूल से जुड़ी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अगर बचपन में ही किसी बच्चे को खुद के बारे में नकारात्मक विचार किसी भी परिस्तिथि के चलते आते हैं , तो ऐसे बच्चे हीन भावना से जूझने लगते है। ये हीन भावना पूरी तरह से बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है और उसके आने वाले भविष्य में कई तरह की मानसिक समस्याओं का कारण बन जाती है। बच्चे को हीन भावना से बाहर निकालना बेहद कठिन हो जाता है। इसके लिए उसके आसपास का माहौल बहुत सकारात्मक और विश्वसनीय होना चाहिए ताकि बच्चा अपने आत्मविश्वास को ना खो पाए।

धीरे धीरे बच्चे का विश्वास जीते और उसके मन में पनप रही हीन भावना को दूर करने की कोशिश करें।

Young girl lying on a couch looking upset while a woman sits behind her, appearing concerned.
Young girl lying on a couch looking upset while a woman sits behind her, appearing concerned.

बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल भी हीन भावना को जन्म देता है। आपस में बच्चों के बीच हर क्षेत्र में मुकाबला होता है, तो बच्चे महसूस करते हैं कि उन्हें हमेशा दूसरों से बेहतर ही करना चाहिए। इस तरह का मानसिक दबाव बच्चों के लिए हानिकारक होता है।

अगर बच्चे के प्रयासों को हमेशा परिणामों के आधार पर ही आंका जाता है, तो यह भी उसे हीन भावना का शिकार बनाता है। अगर बच्चा किसी काम में मेहनत कर रहा है लेकिन परिणाम सही नहीं आया। ऐसी स्तिथि में बच्चों को यह सिखाना आवश्यक है कि प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अगर माता-पिता, बच्चे पर लगातार दबाव डालते हैं, तो बच्चा खुद को दूसरों से कम समझने लगता है। माता-पिता की उम्मीदों का बोझ, आलोचना ये बातें बच्चों के मन में हीन भावना पैदा करती हैं।

अगर बच्चे को हमेशा यह महसूस कराया जाता है कि वह दूसरे बच्चों से कम है, तो उसकी आत्म-छवि पर असर पड़ता है। बच्चों में समानता का अभाव बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना सकता है।

बच्चों के मनोबल को गिराने वाली सबसे ख़ास वजह हैं आलोचना और नकारात्मक टिप्पणियाँ करना । अगर माता-पिता, शिक्षक आदि बच्चे की बार-बार आलोचना करते हैंतो बच्चा अपने बारे में नकारात्मक सोचने लगता है।

Child hugging a woman tightly on a couch, looking sad while being comforted.
Child hugging a woman tightly on a couch, looking sad while being comforted.

बच्चों को घर में भी कई बार भावनात्मक असुरक्षा महसूस होती है। अगर घर में पारिवारिक तनाव, झगड़े या विवाद होते हैं, तो बच्चे में आत्मविश्वास की कमी और मानसिक असुरक्षा बढ़ने लगती है।

माता-पिता जब बच्चों से अवास्तविक अपेक्षाएँ रखने लगते हैं और उनसे हर काम में परफेक्शन की  उम्मीद करते हैं, तो बच्चे दबाव महसूस करने लगते हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि परफेक्शन की कोई सीमा नहीं है और हर बच्चे की अपनी खासियत हैं।

कई बार बच्चे किसी शारीरिक या मानसिक कमजोरी के चलते हीन भावना का शिकार हो जाते हैं। अगर बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर है या पढ़ाई में अच्छा नहीं कर पा रहा है, तो वह खुद को दूसरों से नीचा समझता है।

अपने बच्चे को समय दें, उनसे बातचीत करते रहें। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए अपने बचपन की ऐसी बातें बातें जिनसे आपको प्रेरणा मिली थी और आपके मन की हीन भावनाएं हमेशा के लिए खत्म हो गयी थीं।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...