Overview:धार्मिक आस्था से जुड़ी एक छोटी सी डोरी, लेकिन बड़ी मान्यता
कलावा में तीन गांठें बांधने की परंपरा यूं ही नहीं चली आ रही है। इसके पीछे त्रिदेव, त्रिगुण, त्रिलोक और त्रिकाल जैसी गहरी मान्यताएं जुड़ी हैं। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, एक आशीर्वाद है – जो हर पूजा को पूर्णता देता है।
Spiritual meaning of three knots in Kalawa: हमारे भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ या किसी धार्मिक कार्य की शुरुआत कलावा बांधने से होती है। यह सिर्फ एक लाल-पीला धागा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे होते हैं। खास बात यह है कि जब पंडित या कोई बुजुर्ग कलावा बांधते हैं, तो वे उसमें तीन गांठ लगाते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ तीन ही क्यों? इसका जवाब हमारी परंपराओं में ही छिपा है।
तीन गांठों का त्रिदेव से संबंध

हिंदू धर्म में ब्रह्मा, विष्णु और महेश को त्रिदेव माना गया है। जब कलावा में तीन गांठें लगाई जाती हैं, तो ये गांठें त्रिदेवों को समर्पित होती हैं।
पहली गांठ ब्रह्मा जी को – सृष्टि के रचयिता
दूसरी गांठ विष्णु जी को – पालनकर्ता
तीसरी गांठ शिव जी को – संहारकर्ता
इस तरह व्यक्ति त्रिदेवों की कृपा का पात्र बनता है।
त्रिगुणों का प्रतीक
सिर्फ देवी-देवताओं से ही नहीं, तीन गांठें हमारे अंदर मौजूद तीन गुणों –
सत्व, रज, और तम – का भी प्रतीक मानी जाती हैं।
इन गुणों के संतुलन से ही मनुष्य का जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
तीन लोकों की रक्षा का विश्वास
धार्मिक मान्यता के अनुसार तीन गांठें तीन लोकों –
भू (पृथ्वी), भुवः (आकाश), और स्वः (स्वर्ग) – में व्यक्ति की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं।
इससे व्यक्ति को त्रिस्तरीय सुरक्षा प्राप्त होती है।
रक्षासूत्र की पूर्णता तीन गांठों में ही
कलावा को ‘रक्षासूत्र’ कहा जाता है। यह गांठें बिना बोले तीन बातें कहती हैं –
मैं आस्था के साथ बंधा हूं,
मैं हर बुराई से रक्षा करूंगा,
और मैं हर संकट में साथ दूंगा।
तीनों गांठों के साथ यह सूत्र पूर्णता को प्राप्त करता है।
स्त्री-पुरुष दोनों के लिए है विशेष महत्व
कलावा बांधने की प्रक्रिया स्त्रियों और पुरुषों के लिए समान रूप से शुभ मानी जाती है।
जहां पुरुषों को दाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है, वहीं स्त्रियों को बाएं हाथ में। तीन गांठें दोनों के लिए समान रूप से अनिवार्य मानी जाती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लाभकारी
कलावा हाथ की नसों पर दबाव बनाता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है।
तीन गांठें एक संतुलित पकड़ बनाती हैं और एक्यूप्रेशर के सिद्धांतों के अनुसार शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
संस्कार और श्रद्धा का प्रतीक
तीन गांठें सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि
संस्कार, श्रद्धा और विश्वास का त्रिकोण बनाती हैं।
हर गांठ के साथ एक भावना जुड़ी होती है —
पहली: आस्था,
दूसरी: सुरक्षा,
तीसरी: समर्पण।
