Summary: आखिर यूजीसी के नए नियम क्या हैं, जिन पर देशभर में हो रहा है विवाद?
यूजीसी के नए नियमों ने देशभर की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में हलचल मचा दी है। छात्रों से लेकर शिक्षकों तक, हर कोई इन बदलावों पर अपनी राय दे रहा है।
UGC New Rules: देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन UGC द्वारा लाए गए नए नियमों ने छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के बीच बहस छेड़ दी है। कोई इन्हें शिक्षा में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, तो कोई इन्हें व्यवहारिक रूप से मुश्किल और विवादित मान रहा है। आखिर ये नए नियम क्या हैं, इनमें ऐसा क्या बदलाव है जो इतना विरोध हो रहा है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
यूजीसी के नए नियम क्या हैं?

- यूजीसी के नए नियमों के तहत अब देश के हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर केंद्र (EOC) खोलना जरूरी होगा।
- यह केंद्र खास तौर पर वंचित और पिछड़े वर्ग के छात्रों की मदद के लिए काम करेगा। उन्हें पढ़ाई, आर्थिक सहयोग और सामाजिक सपोर्ट देने के साथ-साथ भेदभाव से जुड़ी शिकायतें भी सुनेगा।
- नियमों के अनुसार, हर संस्थान में एक समता समिति (Equity Committee) भी बनाई जाएगी।
- इस समिति की जिम्मेदारी संस्थान के माहौल को निष्पक्ष और बराबरी वाला बनाए रखने की होगी। समिति की अध्यक्षता विश्वविद्यालय या कॉलेज के प्रमुख करेंगे।
- इसके सदस्यों में वरिष्ठ प्रोफेसर, गैर-शिक्षक कर्मचारी और समाज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समिति में एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों को भी जगह मिले।
- कैंपस में नजर रखने के लिए एक इक्विटी स्क्वॉड भी बनाया जाएगा, जो भेदभाव से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी रखेगा।
- हर विभाग और हॉस्टल में एक इक्विटी एंबेसडर नामित किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी समस्या आसानी से सामने रख सकें।
- यूजीसी ने सभी संस्थानों को 24 घंटे चलने वाली इक्विटी हेल्पलाइन शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
- इसके अलावा, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को एक ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा, जहां छात्र लिखित या ईमेल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
शिकायत कैसे कर सकते हैं?
अगर किसी छात्र को भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो वह अपनी शिकायत कई तरीकों से दर्ज कर सकता है। वह ऑनलाइन पोर्टल या ई-मेल के जरिए अपनी बात लिखित रूप में भेज सकता है।
भेदभाव की शिकायत पर एक्शन कब होगा?
- भेदभाव से जुड़ी कोई भी शिकायत मिलने पर समता समिति को 24 घंटे के अंदर बैठक करना अनिवार्य होगा, ताकि मामले को तुरंत सुना जा सके।
- शिकायत की जांच पूरी करने के बाद समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर संस्थान प्रमुख को सौंपनी होगी।
- इसके बाद संस्थान प्रमुख को रिपोर्ट मिलने से 7 दिन के अंदर जरूरी कार्रवाई करनी होगी, ताकि मामले का समय पर समाधान हो सके।
नए नियम के तहत क्या कार्रवाई होगी?
- भेदभाव के मामले में अंतिम कार्रवाई संस्थान अपने तय नियमों के अनुसार करेगा। दोषी पाए जाने पर विश्वविद्यालय या कॉलेज अपने स्तर पर उचित कदम उठाएगा।
- जरूरत पड़ने पर मामले की जांच किसी अन्य यूजीसी समिति या लागू कानूनों के तहत भी कराई जा सकती है।
- अगर शिकायत में आपराधिक तत्व पाए जाते हैं, तो संस्थान को तुरंत पुलिस को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा।
- समान अवसर केंद्र (EOC) को हर छह महीने में अपनी गतिविधियों और मामलों की रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को देनी होगी।
- इसके अलावा, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को जातीय भेदभाव से जुड़े मामलों की सालाना रिपोर्ट यूजीसी को भेजनी जरूरी होगी।
नियम तोड़ने की सजा
- अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
- यूजीसी एक नेशनल मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाएगा, जो समय-समय पर कैंपस का निरीक्षण कर सकती है।
- नियमों का उल्लंघन करने पर विश्वविद्यालय या कॉलेज की वित्तीय सहायता यानी ग्रांट रोकी जा सकती है।
- इतना ही नहीं, संस्थान की डिग्री देने की मान्यता, ऑनलाइन कोर्स और डिस्टेंस एजुकेशन प्रोग्राम पर भी रोक लगाई जा सकती है।
- गंभीर मामलों में यूजीसी संबंधित संस्थान की मान्यता तक रद्द कर सकता है।
- स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।
नए UGC नियमों से नाराज़गी क्यों?

- नए नियमों में समता समिति में एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग लोगों को शामिल करने की बात कही गई है। लेकिन इसमें जनरल कैटेगरी के प्रतिनिधि को शामिल करने का साफ जिक्र नहीं है। इसी बात को लेकर कुछ छात्र आपत्ति जता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे ऐसा लग सकता है कि जनरल कैटेगरी के छात्रों को सिर्फ आरोपी माना जाएगा, पीड़ित नहीं।
- नए नियमों में झूठी या फर्जी शिकायत करने वालों के लिए किसी तरह के जुर्माने या सजा का स्पष्ट प्रावधान नहीं रखा गया है। इसी वजह से कुछ लोगों का मानना है कि इन नियमों का गलत फायदा उठाया जा सकता है।
- नियमों के मुताबिक, किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के अंदर बैठक कर कार्रवाई शुरू करनी होगी। हालांकि, विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी में फैसला लेने से गलत आरोप लगने और बिना पूरी जांच के निर्णय होने का खतरा बढ़ सकता है।
