Mathura Vrindavan Travel Guide

मथुरा और वृंदावन की ख़ास बात

इस जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और अपनी बाल लीलाएं रचीं थी। यह स्थल न केवल हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए बल्कि उन सभी के लिए विशेष महत्व रखता है जो शांति और भक्ति की खोज में हैं।

Mathura Vrindavan Travel Guide: हमारा देश भारत आध्यात्मिकता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है। मथुरा और वृंदावन हमारे देश में स्थित ऐसे ही दो पर्यटन स्थल हैं। इस जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और अपनी बाल लीलाएं रचीं थी। यह स्थल न केवल हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए बल्कि उन सभी के लिए विशेष महत्व रखता है जो शांति और भक्ति की खोज में हैं। यदि आप तीन दिनों में इन पवित्र स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं तो इस तरह से अपनी यात्रा को प्लान कर सकते हैं। यह लेख कम समय में आपको मथुरा और वृंदावन घूमने की पूरी जानकारी देगा। 

Mathura Vrindavan Travel Guide
The holy shrines of Mathura

मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है और यह स्थान अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से हर भक्त को मंत्रमुग्ध कर देता है। यात्रा की शुरुआत श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से करनी चाहिए। यह मंदिर ठीक उसी स्थान पर स्थित है जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसके बाद द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करने चाहिए जो अपनी भव्यता और अलौकिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान कृष्ण को राजा के रूप में पूजा जाता है। शाम के समय विश्राम घाट पर यमुना आरती का आनंद लिया जा सकता है। यह वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के बाद विश्राम किया था। 

lanes of Vrindavan
The lanes of Vrindavan

भक्ति और प्रेम का प्रतीक वृंदावन मथुरा से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह स्थान भगवान कृष्ण और राधा की दिव्य लीलाओं का साक्षी रहा है। वृंदावन की यात्रा की शुरुआत बांके बिहारी मंदिर के दर्शन से करनी चाहिए। यह मंदिर अपनी अद्भुत मूर्ति और भक्ति भाव के लिए प्रसिद्ध है। इसके बाद वृंदावन का अत्यंत भव्य प्रेम मंदिर देखना चाहिए। यह मंदिर आधुनिक निर्माण शैली का अद्भुत उदाहरण है और इसमें श्रीकृष्ण-राधा की सुंदर झांकियां दिखाई जाती हैं। वृंदावन में इस्कॉन मंदिर भी एक प्रमुख आकर्षण है जहां भक्त निरंतर हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करते रहते हैं। निधिवन देखने के बाद आप अपने दूसरे दिन की यात्रा समाप्त कर सकते हैं। 

Govardhan
The circumambulation of Govardhan and Radha Kund

वृंदावन से थोड़ा आगे जाने पर गोवर्धन पर्वत आता है जोकि धार्मिक रूप से काफी महत्व रखता है। यह वही पर्वत है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यहां की गोवर्धन परिक्रमा श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इसके बाद राधा कुंड और श्याम कुंड के दर्शन करने चाहिए। ये कुंड श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम के प्रतीक हैं और यहां स्नान करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। गोवर्धन क्षेत्र में दानघाटी मंदिर भी दर्शनीय स्थल है, जहां श्रीकृष्ण द्वारा ब्रजवासियों से लिया गया प्रतीकात्मक दान याद किया जाता है। 

मथुरा और वृंदावन की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच का समय उपयुक्त होता है क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। दोनों ही जगहें रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ी हुईं हैं। स्थानीय परिवहन के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं। मंदिरों में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं होती, इसलिए नियमों का पालन करें। निधिवन जैसे स्थानों पर सूर्यास्त के बाद प्रवेश वर्जित होता है।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...