Sankashti Chaturthi 2023: सनातन धर्म में भगवान गणेश जी का विशेष स्थान है। किसी शुभ व धार्मिक कार्यक्रम में सबसे पहले गणेश जी की पूजा करने का विधान है। कोई भी मांगलिक कार्य श्रीगणेश के साथ शुरू होता है। मान्यता है कि बिना गणेश पूजन के कोई भी कार्य सफल नहीं माना जाता। इसलिए भगवान गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है, इसलिए इस दिन श्रीगणेश जी की विशेष उपासना की जाती है। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा करने से घर में सुख—समृद्धि, ऐश्वर्य व ज्ञान की प्राप्ति होती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। तो चलिए जानते हैं इस बार कब है संकष्टी चतुर्थी और इसका महत्व व पूजा विधि।
कब है संकष्टी चतुर्थी

हिंदू पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष चतुर्थी 10 मार्च 2023 की रात 9 बजकर 42 मिनट पर आरंभ होगी, जो 11 मार्च की रात 10 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 11 मार्च को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 3 मिनट पर रहेगा। वहीं, चित्रा नक्षत्र- सूर्योदय से 7 बजकर 11 मिनट तक, स्वाति नक्षत्र- सुबह 7 बजकर 11 मिनट से 12 मार्च को सुबह 8 बजे तक, धुव्र योग- सूर्योदय से शाम 7 बजकर 51 मिनट तक, चंद्रोदय का समय- रात 9 बजकर 47 मिनट पर होगा।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व

पंडित इंद्रमणि घनस्याल के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्रमा दर्शन के साथ समाप्त होता है। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करके कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। कहते हैं कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। इस दिन गणेश की विधि विधान से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख—शांति व समृद्धि आती है। गणेश पूजन से सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

ज्योति ष शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पूजा की चौकी तैयार करें और उस पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा अर्पित करें। भगवान गणेश जी की पूजा करें और गणेश चालीसा का पाठ करें। गणेश आरती के साथ पूजा संपन्न करें। शाम के समय गणेश जी की कथा सुनने के बाद अगरबत्ती करें, गणेश जी को प्रिय भोग लगाएं। रात्रि में चंद्रमा की पूजा करने के बाद जल अर्पित करें और सुख—समृद्धि की कामना करें।
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